बागपत, जेएनएन। करीब पचास साल से जारी यूपी-हरियाणा सीमा विवाद का हल होने का इंतजार दोनों राज्यों के किसानों को है। आए दिन फसल बुआई व कटाई को लेकर दोनों राज्यों के किसान आमने-सामने आ जाते हैं।

हर साल फसल की बुआई व कटाई के समय हरियाणा के सोनीपत, पानीपत और यूपी के बागपत जनपद के किसानों में खूनी संघर्ष होता है। तीन माह पूर्व नंगला बहलोलपुर के किसान की गोली मारकर हत्या कर दी गई। चार दिन पूर्व इसी गांव के खादर में फसल उजाड़ दी गई। नवंबर 1997 में ग्राम कुरड़ी के एक किसान की मौत हुई थी। वर्ष 1996-97 में बागपत के दो अफसरों को सोनीपत के राई थाना क्षेत्र में बंधक बना लिया गया था। विवाद निस्तारण के लिए दिसंबर 2019 मे यमुना खादर में सीमा स्तंभ खोजने का कार्य भी किया था, लेकिन समस्या का हल नहीं निकला। एडीएम अमित कुमार सिंह ने कहा कि दोनों राज्यों के अधिकारी सीमा विवाद को निपटाने के प्रयास में लगे हैं। कुछ भूमि का विवाद कोर्ट में विचाराधीन है।

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यह है सीमा विवाद

बागपत की हरियाणा के सोनीपत तथा पानीपत से करीब 50 किमी सीमा मिली हुई है। यमुना धार बदलने से बागपत के 27 गांव व हरियाणा के 22 गांवों के हजारों किसानों की करीब 4500 हेक्टेयर जमीन विवाद में फंसी है। इसमें 2850 हेक्टेयर जमीन बागपत और 1750 हेक्टेयर जमीन हरियाणा के किसानों की है।

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बागपत के इन गांवों सीमा विवाद

बागपत के गांव सांकरौद, मवीकलां, नंगला बहलोलपुर, काठा, पाली, बागपत खादर, खड़वारी, सिसाना, निवाड़ा, नैथला, फैजुल्लापुर, फैजपुर-निनाना, सुल्तानपुर हटाना, खेड़ा इस्लामपुर, खेड़ी प्रधान, अकबरपुर ठसका, कोताना, जागौस, शबगा, ककौर, बदरखा, छपरौली, कुरड़ी, नांगल, टांडा गांव के खादर क्षेत्र की जमीन का विवाद है।

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क्या है दीक्षित अवार्ड

केंद्र सरकार ने वर्ष 1983 में तत्कालीन सिचाई मंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में दीक्षित अवार्ड गठित किया गया था। इसके अनुसार वर्ष 1974 की यमुना धार को आधार मानकर दोनों राज्यों की सीमा पर सीमांकन किया गया था। जमीन किधर जाए, लेकिन उसका मालिक वही होगा जिसकी वास्तविक जमीन है।