बागपत (अश्वनी त्रिपाठी)। माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के बाद से सुनील राठी का खौफ बढ़ गया है। जेल में बंदियों से लेकर बंदी रक्षक व जांच अधिकारी तक सुनील राठी के पास जाने से कतरा रहे हैं। मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की जांच कर रहे एक जांच अधिकारी ने तो उसकी बैरक में बगैर बुलेटप्रूफ जैकेट के जाने से ही इन्कार कर दिया। उनके लिए बुलेटप्रूफ जैकेट लाई गई और कड़ी सुरक्षा में सुनील राठी की बैरक में ले जाया गया। 

बुलेटप्रूफ जैकेट का इंतजाम करो

जेल के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की जांच करने के लिए आए एक जांच अधिकारी को पूछताछ के लिए सुनील राठी की बैरक में जाना था, लेकिन अफसर ने वहां पर जाने से साफ इन्कार कर दिया। उन्होंने जेल अधीक्षक से कहा कि पहले बुलेटप्रूफ जैकेट का इंतजाम करो, उसे पहनने के बाद ही सुनील राठी के पास जाऊंगा। इसके बाद उन्हें बुलेटप्रुफ जैकेट उपलब्ध कराई गई। कई अहम बिंदुओं पर सुनील राठी से पूछताछ करने के बाद अफसर वहां से लौटे। जेल अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र ने कहा कि जेल में आने वाले सभी जांच अधिकारियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्हें पुलिस सुरक्षा में ही सुनील राठी के पास भेजा जा रहा है। मांग करने पर बुलेटप्रूफ जैकेट भी उपलब्ध कराई जा रही है।

मजिस्ट्रेट जांच शुरू

बागपत जिला कारागार में पूर्वांचल के माफिया डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की मजिस्ट्रेट जांच शुरू हो चुकी है। जांच अधिकारी एडीएम ने पुलिस व जेल अधिकारियों से हत्याकांड से जुड़े साक्ष्य मांगे हैं। साथ ही आमजन भी एडीएम के समक्ष उपस्थित होकर लिखित या मौखिक साक्ष्य दे सकते हैं। इसके अलावा एसपी को निर्देश दिए गए हैं कि वह मुन्ना बजरंगी के परिवार वालों को बयान देने के लिए उपस्थित होने की सूचना प्रेषित कराएं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुन्ना बजरंगी हत्याकांड की मजिस्ट्रेट जांच कराने की बात कही थी। इस पर डीएम ऋषिरेन्द्र कुमार ने एडीएम वित्त व राजस्व लोकपाल ङ्क्षसह को जांच अधिकारी नामित किया। एडीएम ने जांच शुरू करते हुए तीन दिन के भीतर जेल अधीक्षक से हत्याकांड से संबंधित उपलब्ध अभिलेखों की प्रमाणित प्रति तथा थाना खेकड़ा प्रभारी निरीक्षक से समस्त अभिलेख, एफआइआर तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा आमजन भी 25 जुलाई तक किसी भी कार्य दिवस में सुबह 10 से शाम पांच बजे तक एडीएम के समक्ष उपस्थित होकर साक्ष्य उपलब्ध करा सकते हैं। एडीएम ने इसकी पुष्टि की है। 

नहीं होती थी कोई चेकिंग, खुल जाते थे जेल के दरवाजे

बागपत जिला कारागार में सुनील राठी ही नहीं जब भी कोई कुख्यात आता था, तो उसे पूरी सहूलियत मिलती थी। पश्चिम उप्र के कई कुख्यात अपराधी बागपत जेल में रहे। इन अपराधियों से मिलने आने वालों की सीधे कारागार में एंट्री होती थी। रोकना तो दूर किसी को टोकने की भी किसी कर्मचारी की हिम्मत नहीं होती थी। दोघट क्षेत्र के कस्बा टीकरी निवासी सुनील राठी हरिद्वार जेल से 31 जुलाई 2017 को बागपत जेल में शिफ्ट हुआ था। तभी से वह इस जेल में है। उसके गैंग के कई सदस्य यहां पर बंद हैं। आरोप है कि यहां पर रहते हुए इनका गैंग आसानी से संचालित हो रहा था। जेल का स्टाफ सुनील राठी से डरता था। इसी का नतीजा था कि राठी से मिलने आने वालों के लिए कोई रोकटोक नहीं रही। सुनील का नाम लेते ही जेल के दरवाजे खुल जाते थे। ऐसी स्थिति में चेकिंग का तो कोई सवाल ही नहीं है। दूसरी ओर राठी अपनी बैरक में पहले ऐश- ओ-आराम से रहता था। बैरक में एलसीडी और कूलर तक लगा हुआ था। सूत्रों की माने तो जेल का स्टाफ कभी उसकी बैरक की चेकिंग नहीं करता था। 

पूर्वांचल का सफेदपोश सूत्रधार, 10 करोड़ की सुपारी!

माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले में एक और सनसनीखेज तथ्य सामने आया है। खाकी के हाथ वारदात का पूर्वांचल कनेक्शन लगा है। इससे यह शक पुख्ता हो रहा है कि वारदात का सूत्रधार पूर्वांचल का एक सफेदपोश ही है। कुख्यात सुनील राठी तो बस एक मोहरा है। पुलिस जांच के अनुसार 10 करोड़ रुपये की सुपारी लेकर बजरंगी को मौत के घाट उतारा गया है। 2019 में जौनपुर लोकसभा सीट पर चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहा बजरंगी एक नेता के आड़े आ रहा था, जो कत्ल की मुख्य वजह बनी। बजरंगी लोकसभा चुनाव लडऩा चाहता था। एक बाहुबली से उसकी वर्चस्व की लड़ाई भी चल रही थी। इसी जिद में वह बाहुबली को टक्कर देना चाहता था। बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह बाहुबली पर हत्या कराने का आरोप भी लगा चुकी है।

जौनपुर के एक बैंक से सात करोड़ का ट्रांजेक्शन 

बागपत से हमारे संवाददाता पंकज तोमर ने विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से बताया कि कुख्यात सुनील राठी पूर्वांचल में अपना साम्राज्य स्थापित करना चाहता है। जांच रिपोर्ट की मानें तो, जेल में बजरंगी की हत्या से एक दिन पहले जौनपुर के एक बैंक से करीब सात करोड़ रुपयों का ट्रांजेक्शन हुआ है। तीन करोड़ रुपये वहीं के दूसरे बैंक से निकाले गए। इसलिए 10 करोड़ की सुपारी का जिक्र जांच में सामने आया है। पुलिस बैंक खातों की डिटेल निकलवा रही है। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सुनील के पास काफी समय से उसकी अपनी पिस्टल थी। जब वह जेल में आया तो पिस्टल लेकर आया था। यह देशी है या विदेशी, फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा। जेल अधीक्षक (अतिरिक्त चार्ज) विपिन कुमार मिश्रा का का कहना है कि अभी इस मामले में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। विवेचक इसे सुलझाने में लगे हैं। आइजी-मेरठ रामकुमार ने बताया कि फिलहाल पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है। सीमा सिंह के आरोप पर भी गौर किया जा रहा है। उम्मीद है, जल्द घटना का राजफाश हो जाएगा। पुलिस बेहद नजदीक पहुंच चुकी है।

By Nawal Mishra