बागपत, जेएनएन। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में हर जाति व धर्म के लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। स्वाधीनता मिलने के बाद देश के हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन यापन का अधिकार देने की ओर सरकारों ने उचित कदम उठाए। इससे स्वाधीनता के आदर्शों का पालन किया। बाल विवाह पर रोक, बुजुर्गों का अधिकार, महिलाओं के अधिकार, दहेज प्रथा पर रोक लगाई गई। बुजुर्गों के अधिकार को लेकर सरकारें गंभीर है। जहां बड़े बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता, उस परिवार में सुख, संतुष्टि और स्वाभिमान नहीं आ सकता। परिवार की शान कहे जाने वाले हमारे बड़े-बुजुर्ग आज परिवार में अपना ही अस्तित्व तलाशते नजर आ रहे हैं। तिनका-तिनका जोड़कर अपने बच्चों के लिए आशियाना बनाने वाले ये पुरानी पीढ़ी के लोग अब खुद आशियाने की तलाश में दर-ब-दर भटक रहे हैं। ऐसे में इनका ठिकाना बन रहे हैं वृद्धाश्रम। वहां इन्हें रहने को छत और खाने को भरपेट भोजन मिल रहा है। बगैर कुछ सोचे-समझे हम भी दूसरों की देखा-देखी एकल परिवार प्रणाली को अपनाकर अपनों से ही किनारा कर रहे हैं। ऐसा करके हम अपने हाथों अपने बच्चों को उस प्यार, संस्कार, आशीर्वाद व स्पर्श से वंचित कर रहे हैं। जो उनकी जिदगी को संवार सकता है। जिस मां को धरती से श्रेष्ठ,और पिता को आकाश से ऊंचा स्थान दिया है, बड़े-बुजुर्ग परिवार की शान हैं, वो कोई कूड़ा-करकट नहीं हैं, जिसे कि परिवार से बाहर निकाल फेंका जाए। बुजुर्गों को संपत्ति में अधिकार होने, जीवन यापन के लिए संतानों से आर्थिक मदद दिलाने जैसे अधिकार होंगे, तो वे सम्मानजनक जीवनयापन कर सकेंगे।

इसके अलावा बाल विवाह व दहेज प्रथा के विरोध में समाज को आगे आना होगा। हालांकि कानून बनने से इस पर अंकुश जरूर लगा है, लेकिन समाज में जागरूकता की कमी के कारण मामले प्रकाश में आते है। बेटियों को शिक्षित करने पर जोर दिया जाए। बेटियों का गर्भ में कत्ल करने वाले लोगों का समाज में बहिष्कार होना चाहिए। बेटियां अब आगे बढ़ रही है, बस उन्हें अवसर व अधिकार दे दीजिए। जब तक समाज बेटियों की अहमियत को नहीं समझेगा, तब तक कुछ नहीं हो सकता। देश को स्वाधीन कराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के हर नागरिक को आजादी से जीने का सपना देखा था, जो आज समाज में फैली कुरीतियों के कारण साकार नहीं हो पा रहा है। देश के हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन यापन का अधिकार मिलना चाहिए, तभी देश के स्वाधीनता के आदर्शों का सही मायनों में पालन होगा।

------ प्रवेश कुमार, प्रधानाचार्य डीएवी पब्लिक स्कूल बागपत।

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