बागपत, जेएनएन। सरूरपुर गांव में माता के मंदिर का विवाद गहरा गया है। बुधवार को एक बार फिर ग्रामीण और सीएचसी स्टाफ आमने-सामने आ गया था। इसको लेकर हंगामा हुआ। अफसरों ने मौके पर पहुंचकर समझा-बुझाकर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।

दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे किनारे सरूरपुर गांव में सीएचसी के सामने माता का मंदिर 200 साल से अधिक पुराना है। दूर-दराज से आकर भक्त पूजा-अर्चना करते हैं। हाईवे निर्माण की जद में आने के कारण मंदिर को ग्रामीणों की सहमति पर वहां से हटा दिया गया था। ग्रामीण मंदिर को सीएचसी परिसर में स्थापित करना चाहते है, लेकिन इसका सीएचसी स्टाफ विरोध कर रहा है। बुधवार को ग्रामीण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करना चाहते थे, इसलिए वहां पर इकट्ठा हुए थे। इस पर सीएचसी स्टाफ ने आपत्ति कर अपनी विभागीय अधिकारियों को सूचना दी। नायब तहसीलदार देवेंद्र मिश्रा और बागपत सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर विभाष राजपूत मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया और कहा कि इस मामले से डीएम शकुंतला गौतम को अवगत कराया जाएगा, ताकि समस्या का निस्तारण हो चुके। ग्रामीणों ने भी जिलाधिकारी को पत्र लिखा। सीएचसी अधीक्षक डॉक्टर विभाष राजपूत का कहना है कि सीएचसी स्टाफ का काम मरीजों का उपचार करना है। मंदिर कहां स्थापित होगा इसका निर्णय शासन-प्रशासन लेगा। उन्होंने अफसरों से मामले को अवगत करा दिया है। बता दें कि पूर्व में भी इस मामले को लेकर विवाद हो चुका है। ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए है।

Posted By: Jagran

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