जागरण संवाददाता, बागपत : बागपत में गन्ने की खेती अधिक होती है। यही कारण की गन्ने की खेती का प्रतिशत बढ़ गया है। दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाइवे का शिलान्यास करने आए केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को गन्ने के अलावा अन्य फसलों की खेती करने की सलाह दी। कहा कि दिल्ली का बाजार नजदीक है। किसान अन्य फसलों से ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। वैसे गन्ने की फसल को किफायती माना जाता है। ऐसे में जिले के किसान गन्ने की खेती को कम करने या तिलांजलि दे पाएंगे। गन्ने की खेती पर किसानों के विचार जानिए..

भाकियू जिलाध्यक्ष चौ. प्रताप ¨सह गुर्जर का कहना है कि किसान मजबूरी में गन्ना खेती करते हैं। बागपत में कृषि उपज बेचने को मंडी तक नहीं है। बागपत के किसानों को अपना गेहूं और धान तक हरियाणा ले जाकर बेचना पड़ता है। दूसरी वजह यह है कि सरकार ने बेसिक कोटा तय कर समर्थन मूल्य पर गन्ना क्रय कराती है। यानी गन्ना खरीद की गारंटी है। यदि सरकार इसी तरह की खरीद की व्यवस्था दलहन, तिलहन और अनाज और सब्जियों के लिए कर दें तो आधे से ज्यादा किसान गन्ने की खेती करना छोड़ देंगे।

कासिमपुर खेडी निवासी किसान नेता राजेंद्र ¨सह कहते हैं कि हम योगी के बयान से सहमत नहीं है, क्योंकि सरकार पहले किसानों को गन्ना खेती के इतर दूसरी खेती करने को तकनीकी जानकारी और बीज, खाद, यंत्रों आदि सुविधा तो दें। फिर दूसरी फसलों की खेती करने की बात करें। निनाना निवासी हरेंद्र चौधरी भी कहते हैं कि किसानों को गन्ना खेती इसलिए रास आ रही कि एक बार बुआई करने के तीन साल तक फसल मिलती है। अन्य फसलों के मुकाबले कम काम करना पड़ता है और दाम अच्छा मिलता है। निनाना के धीर ¨सह कहते हैं कि बागपत के किसान इसलिए नुकसान में हैं कि हाथ धोकर गन्ना खेती के पीछे ही हाथ धोकर पड़े हैं। किसान अपनी आधी जमीन पर गन्ना खेती करें और बाकी आधी खेती पर गेहूं, धान और सब्जियों तथा फल-फूलों की खेती करेंगे तो फिर ज्यादा आमदन मिलेगी। बता दें कि बागपत में 74 हजार हेक्टेयर जमीन पर गन्ना खेती होती है।

Posted By: Jagran