बागपत, जेएनएन। जनपद का एक गांव है बरवाला। कोरोना महामारी के विकराल होते रूप को देखकर गांव के लोग कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं करते हैं। यहां गाइडलाइन का पूरा पालन किया जाता है। ग्रामीण घरों से बेवजह नहीं निकलते। महिलाएं व बच्चे घरों में ही रहते हैं। यदि घर से खेत या बाजार जाने के लिए निकलते हैं, तो मुंह पर मास्क लगाते हैं। ग्रामीणों के घरों के अंदर रहने से गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा रहता है। बरवाला गांव की आबादी लगभग सात हजार है। यह गांव दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से साढ़े तीन किमी हटकर है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर गांव में एक उपकेंद्र है। इस गांव की खासियत यह है कि यहां के लोग कोरोना गाइडलाइन का ठीक से पालन करते हैं। ग्रामीण परिवार समेत घरों में रहते हैं। खेत या बाजार में जाने पर मास्क लगाते हैं। परिवार का एक ही सदस्य बाजार में जरूरी वस्तु आटा, दाल, सब्जी आदि लेने के लिए बाजार में जाता है।

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20 अप्रैल से बरत रहे सावधानियां

गांव के देवेंद्र और इंद्रपाल ने बताया कि कोरोना महामारी फैली हुई है। लोग महामारी की चपेट में आ रहे हैं। गांव में स्वास्थ्य सेवा के नाम पर एक उपकेन्द्र ही है, इसलिए लोग महामारी से बचाव को लेकर जागरूक हो गए हैं। ग्रामीण कोरोना की दूसरी लहर से बचने के लिए 20 अप्रैल से अपने घरों में रहकर सावधानियां बरत रहे हैं। घर से बाहर जरूरी काम होने के बाद ही मास्क लगाकर जाते हैं और घर में आते ही साबुन से हाथ धोते हैं या सैनिटाइजर का प्रयोग करते हैं। किसान खेतों में जाते हैं, तो एक साथ भैंसा बुग्गी पर नहीं बैठते हैं।

गांव के बुजुर्ग व युवा कर

रहे पूरी तरह पालन

मुनेश बरवाला ने बताया कि कोरोना वायरस से एक व्यक्ति और दूसरी बीमारियों से छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कोरोना से दो लोग पीड़ित हैं। गांव में कुछ लोग बुखार और खांसी से बीमार हैं, इसलिए गांव के लोग घरों के अंदर रहकर अपनी रक्षा कर रहे हैं। बुजुर्ग लोग एक साथ चौपाल पर नहीं बैठते हैं। युवा गांव के चौराहों पर एक साथ खड़े नहीं होते हैं, ताकि गांव में कोरोना महामारी न फैले। गांव के लोग कोरोना गाइडलाइन का पूरा पालन करते हैं और इसका फायदा होता दिखाई दे रहा है।