बागपत, कपिल कुमार। यह तंत्र का वह कुरुप चेहरा है जहां सब कुछ बिकाऊ है। अफसोस इस बाजार में इंसान की कोई कीमत नहीं है। यहां तो ईश्वर की अनमोल कृति इंसान का शव जलाने के लिए तंत्र लकड़ी तक नहीं जुटा सका। सड़े गले टायरों से ही चिता सजाई गई और अंतिम संस्कार कर दिया। चंद पैसे बचाने की खातिर पुलिसकर्मी लावारिश शवों को कूड़ा-करकट और टायरों की चिता के हवाले कर देते हैं। यह खेल किसी एक थाने में नहीं बल्कि पूरे महकमे में होता रहता है। 

अंतिम संस्कार के लिए मिला धन

  • कफन व अन्य सामग्री आदि के लिए-300 रुपए
  • शमशान-कब्रिस्तान ले जाने के लिए-400 रुपए
  • दफनाने या दाह संस्कार के लिए-2000 रुपए

मामला बेहद गंभीर कराएगे जांच

दरअसल, दूसरों को मानवता का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस इस ककहरे पर खुद अमल नहीं करती। यह बेहद अमानवीय है। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए पुलिस को सरकार की ओर से निर्धारित धनराशि दी जाती है ताकि शवों का अंतिम संस्कार ससम्मान किया जा सके। एएसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि ऐसा है तो गंभीर मामला है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। 

यमुना घाट पर दहकती सच्चाई दिखी

पुलिस इस पैसे को बचाने के लिए टायर, कबाड़ या अन्य ऐसी ही सामग्री से अंतिम संस्कार कर देती है। बुधवार को यमुना घाट पर यह सच्चाई दिखी भी। रविवार को सिसाना गांव के जंगल में नलकूप के हौज में एक अधेड़ व्यक्ति का शव मिला था। उसकी शिनाख्त नहीं हुई। 72 घंटे बीतने के बाद डॉक्टर ने पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव को पुलिसकर्मी मोर्चरी से यमुना घाट पर लेकर पहुंचे। वहां पुराने टायरों की चिता बनाई गई। फिर पेट्रोल छिड़ककर उसमें आग लगाकर शव रखकर जला दिया गया। जिसने भी यह नजारा देखा उसी ने पुलिस को कोसा। 

 

Posted By: Nawal Mishra

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