बागपत, जेएनएन। डेंगू के बढ़ते प्रकोप के बीच बकरी के दूध की मांग बड़ी तेजी से बढ़ रही है। पिछले महीने तक 60-70 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला बकरी का दूध अब 300 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है।

हालात यह है कि लोग गांव-गांव जाकर मुंहमांगी कीमत पर बकरी का दूध खरीद कर ला रहे हैं। दरअसल, कुछ आयुर्वेदिक चिकित्सकों और लोगों का मानना है कि बकरी का दूध प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ाने में बेहद कारगर है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है फिर डेंगू बुखार की चपेट में आने वाले मरीज के स्वजन बकरी के दूध के अलावा पपीते के पत्ते ढूंढ-ढूंढकर ला रहे हैं। बुखार के मरीजों के घरेलू उपचार के तहत भी बकरी के दूध का प्रयोग किया जा रहा है। इसके अलावा पपीते के पत्तों से बनी टेबलेट्स भी खूब खरीदी जा रही है। प्रशिक्षित चिकित्सक के मुताबिक लें दवा और खानपान : डा. अनिल जैन

आस्था हास्पिटल के वरिष्ठ फिजीशियन डा. अनिल जैन के मुताबिक, लोग भ्रांतिवश प्रशिक्षित चिकित्सकों की बात पर विश्वास करने की बजाए सुनी-सुनाई बातों में ज्यादा विश्वास करते हैं। डेंगू के मरीजों में बकरी का दूध देना कोई उपचार नहीं है। मरीज को चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा और खानपान लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्लेट्लेट्स कम होने का मतलब डेंगू नहीं है बल्कि वायरल, मलेरिया, टायफाइड, हेपेटाइटिस बी में भी प्लेटलेट्स कम जाते हैं। इसीलिए बुखार की सही जांच करानी जरूरी है। स्वस्थ शरीर के लिए योग जरूरी

गेटवे इंटरनेशनल स्कूल में शनिवार को एक दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया गया।

योग शिक्षिका नेहा नैन ने विभिन्न प्राणायाम और आसन कराए। इसके फायदे और किस तरह करना है इसकी जानकारी दी। प्रधानाचार्य अमित चौहान ने कहा कि विद्यालय में समय-समय पर योगाभ्यास कराने के उद्देश्य से यह कि बच्चे इसके महत्व को समझे और अपने जीवन का हिस्सा बनाए। गीता, रुचि, मनोरमा का सहयोग रहा।

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