दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर पर फिर धंसी सड़क, पांच किलोमीटर में 10 से ज्यादा धंसान, गुणवत्ता पर उठे सवाल
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर बरसात के बाद बड़ौत के पास सड़क फिर धंस गई है, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

बड़ौत के पास दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर सड़क की मरम्मत करते कर्मचारी। जागरण
HighLights
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर बरसात के बाद सड़क फिर धंसी।
बड़ौत के आसपास दस से अधिक स्थानों पर सड़क में धंसान।
निर्माण गुणवत्ता और पिछली तकनीकी जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल।
जागरण संवाददाता, बड़ौत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर दो दिन की बरसात ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। 27 और 28 सितंबर को लगातार हुई वर्षा के बाद कॉरिडोर पर कई स्थानों पर सड़क धंस गई।
अकेले बड़ौत के आसपास लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में 10 से अधिक स्थानों पर सड़क में धंसान सामने आया है। सड़क धंसने के बाद संबंधित एजेंसी ने अब मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। कई जगह युद्धस्तर पर सड़क को दुरुस्त करने का काम चल रहा है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को आधुनिक और सुरक्षित यातायात के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद बरसात के बाद सड़क में जगह-जगह धंसान होने से निर्माण की गुणवत्ता और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। बड़ौत क्षेत्र में ही कम दूरी के भीतर एक साथ कई स्थानों पर सड़क प्रभावित हुई है। इससे वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्सों को दोबारा मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
कुछ माह पहले हुई थी तकनीकी जांच
खास बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब वर्षा के बाद कॉरिडोर की सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। कुछ महीने पहले बरसात के दौरान भी सड़क के कई हिस्सों में खामियां सामने आई थीं। इसके बाद शासन स्तर से सड़क की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराए जाने की बात सामने आई थी।
तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर सड़क का निरीक्षण और जांच की थी, लेकिन अब तक उस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक होने की जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तकनीकी जांच पूरी हुई भी या नहीं।
मरम्मत के साथ जांच रिपोर्ट का भी इंतजार
कॉरिडोर पर सड़क धंसने के बाद फिलहाल मरम्मत का काम तो शुरू हो गया है, लेकिन निर्माण की मूल समस्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सवाल यह भी है कि यदि पिछली तकनीकी जांच में सड़क की गुणवत्ता या निर्माण प्रक्रिया में कोई कमी सामने आई थी तो उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए। अब बरसात के बाद दोबारा सड़क धंसने से पुरानी तकनीकी जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो गई है।
सड़क की मरम्मत के साथ यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि धंसान की वजह क्या है और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई। लोगों की नजर अब संबंधित विभाग की तकनीकी जांच रिपोर्ट और कार्रवाई पर है।
वहीं, इस संबंध में एनएचएआई के पीडी नरेंद्र सिंह का पक्ष लेने के लिए मोबाइल पर काल की गई, जो उन्होंने रिसीव नहीं की। इसके अलावा वाट्सएप पर भी मैसेज भेजा गया, उसका भी जवाब नहीं दिया।
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