गड्ढों का 'डेंजर जोन': दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर को जोड़ने वाला मार्ग बदहाल, सहारनपुर में सरकारी अमला बेखबर और लोग लाचार
Saharanpur News: दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर को छुटमलपुर से जोड़ने वाला लगभग दो किलोमीटर लंबा मार्ग है, जहां गहरे गड्ढों के ...और पढ़ें

HighLights
गहरे गड्ढों के कारण प्रतिदिन हो रही हैं दुर्घटनाएं, वाहन क्षतिग्रस्त।
स्थानीय लोगों ने लगाए बैरिकेड, विभाग की अनदेखी जारी।
संवाद सूत्र, छुटमलपुर (सहारनपुर)। दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॅरिडोर को छुटमलपुर से जोड़ने वाला करीब दो किलोमीटर लंबा मार्ग इन दिनों बदहाल स्थिति में है। जगह-जगह बने बड़े और गहरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए मुसीबत का कारण बन रहे हैं। इन गड्ढों में प्रतिदिन दोपहिया वाहन व ई-रिक्शा चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं, जबकि वाहनों को भी नुकसान पहुंच रहा है।
दिल्ली-देहरादून इकोनामिक काॅरिडोर के रसूलपुर अंडरपास से होकर छुटमलपुर तक जाने वाला करीब दो किलोमीटर का यह मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इसी मार्ग से छुटमलपुर-सहारनपुर होकर दिल्ली तथा अंबाला और पंजाब की ओर जाने वाली रोडवेज बसें, अन्य भारी और हल्के वाहन गुजरते हैं। रसूलपुर से बिहारीगढ़ और देहरादून की ओर जाने के लिए यहीं से सर्विस रोड भी शुरू होती है। इसके लिए यहां अंडरपास का निर्माण कराया गया है।
रसूलपुर अड्डे और रसूलपुर मंडी के सामने सड़क की स्थिति सबसे अधिक खराब है। रसूलपुर मंडी में ही प्रतिदिन सैकड़ो ई रिक्शा,टेंपो, डीसीएम आदि का आवागमन होता है। यहां सड़क पर करीब एक-एक फीट तक गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें हर समय पानी भरा रहता है। बरसात के दिनों में कई स्थानों पर लंबे समय तक पानी नहीं सूखता। पानी भरे होने के कारण विशेषकर मोटरसाइकिल सवारों और अन्य हल्के वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं।
भारतीय किसान यूनियन तोमर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवा अध्यक्ष पारित उपाध्याय, रसूलपुर मंडी के आढ़ती निशु गोयल, इरफान अली तथा देहरादून कालेज की छात्रा शुचि भारद्वाज ने बताया कि प्रतिदिन अनेक बाइक सवार गड्ढों में पहिया फंसने से गिर जाते हैं। इससे उनके वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और उन्हें चोटें भी आती हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वाहन चालकों को दुर्घटना से बचाने के लिए आसपास के दुकानदारों और ग्रामीणों ने रसूलपुर अड्डे और मंडी स्थल के सामने सड़क के बीचोंबीच बैरिकेड खड़े कर दिए हैं, ताकि वाहन चालक पहले से सतर्क होकर वाहन चला सकें। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब छह माह से इस दो किलोमीटर लंबे मार्ग की हालत लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग द्वारा इसकी मरम्मत के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
