यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 06, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Baghpat Lok Sabha Seat: 57 साल के इतिहास में सिर्फ एक बार गैर जाट सांसद, चौधरी परिवार का रहा खास नाता
Baghpat Lok Sabha Seat बागपत लोकसभा सीट पर लोकसभा चुनावों में सभी की नजर है। इस सीट से चौधरी परिवार ...और पढ़ें

HighLights
- हर बार किसी जाट के सिर पर बंधी जीत की पगड़ी
- कांग्रेस की प्रचंड लहर न कर पाई थी खास कमाल
- बागपत लोकसभा सीट से चौधरी परिवार का रहा खास नाता
जहीर हसन, बागपत। पहली बार चौधरी परिवार के लोकसभा चुनाव से दूरी बनाने पर सुर्खियों में आई बागपत लोकसभा सीट का गजब इतिहास रहा। जिसे सिर पर बैठाया उसे जमीन पर लाने में देर नहीं की। 57 साल में खूब उथल-पुथल मची और रोमांचक मुकाबले हुए लेकिन एक बार को छोड़कर हर बार सांसद जाट जाति से ही बना।
1967 में वजूद में आई बागपत संसदीय सीट पर वर्ष 2019 तक 14 बार चुनाव हुआ। पहली बार काकोर सिंह शास्त्री निर्दलीय चुनाव लड़कर संसद पहुंचे थे। 1971 में रामचंद्र विकल और 1977 से 1984 तक स्व. चौधरी चरण सिंह तीन बार सांसद रहे।
चौधरी परिवार का है इस सीट से खास नाता
1989 से 2009 तक सात बार स्व. अजित सिंह सांसद बने। एक बार सोमपाल शास्त्री 1998 में अजित सिंह को हराकर सांसद बने। दो बार डा. सत्यपाल सिंह ने 2014 में अजित सिंह तथा 2019 में जयन्त चौधरी को हराकर संसद पहुंचने का शानदार कीर्तिमान बनाया। यानी बागपत सीट से पहली बार से 2019 तक संसद पहुंचने वालों में रामचंद्र विकल को छोड़ बाकी सभी जाट जाति से हैं।
14 बार चुनावों में 13 बार जाट पहुंचा संसद
बात साफ है कि बागपत के मतदाताओं ने 57 साल में 14 बार हुए चुनावों में 13 बार जाट जाति के व्यक्ति को ही संसद पहुंचाने का काम किया। यूं बागपत के मतदाताओं ने तीन बार चौधरी परिवार के अजित सिंह और जयंत चौधरी को झटका दिया, लेकिन उनके सामने हर बार चुना जाट को।
इस लोकसभा चुनाव पर टिकी नजर
हालांकि 1989 में कांग्रेस के महेश शर्मा तथा 1996 में सपा के मुखिया गुर्जर और 2009 में पूर्व विधायक गुड्डू पंडित के भाई मुकेश शर्मा ने जबरदस्त टक्कर दी, लेकिन संसद पहुंचने में सफलता नहीं मिली। अब फिर लोकसभा चुनाव का एलान होना है इसलिए कुछ कहना मुश्किल है कि ऊंट किस करवट बैठेगा।
एक बार कांग्रेस से सांसद बने थे अजित सिंह
1996 में स्व. चौधरी अजित सिंह ने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर बागपत से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। यदि अजित सिंह के इस चुनाव को छोड़ दें तो कांग्रेस का 1971 के बाद कोई भी बागपत से सांसद नहीं बना।
रेल वाले सांसद
1977 में बागपत से कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए थे गाजियाबाद के दादरी के बसंतपुर निवासी रामचंद्र विकल। 52 वर्ष बाद भी बागपत के पुराने लोग गुर्जर समाज से आने वाले रामचंद्र विकल को भूले नहीं हैं, क्योंकि 1974 में उन्होंने दिल्ली-सहारनपुर वाया शामली रेल लाइन का निर्माण करवाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से शुभारंभ कराया था। इस रेल लाइन के चालू होने से न केवल बागपत बल्कि दूसरे जिलों के भी लाखों लोगों का सफर सुहाना बना।
