डॉक्टरों को भी देनी होगी परीक्षा, फेल हुए या छोड़ा तो रुक जाएगा वेतन; स्वास्थ्य विभाग का कड़ा आदेश
बदायूं में सरकारी डॉक्टरों को अब कर्मयोगी पोर्टल पर ऑनलाइन कोर्स पूरा कर परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा में 70% ...और पढ़ें

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HighLights
अस्पताल के सीएमएस ने जारी की सूचना, नहीं तो रुकेगा वेतन
जागरण संवाददाता, बदायूं। सरकारी डाॅक्टर अब सिर्फ मरीजों का इलाज ही नहीं करेंगे, बल्कि खुद भी छात्र बनकर ऑनलाइन पढ़ाई करेंगे और परीक्षा भी देंगे, तभी उन्हें प्रमाण पत्र मिलेगा। शासन ने इसके लिए कर्मयोगी पोर्टल पर एक विशेष माड्यूल अनिवार्य कर दिया है। जिला अस्पताल के सीएमएस ने इस संबंध में सभी डॉक्टरों को पत्र जारी कर कोर्स पूरा करना अनिवार्य किया है, अन्यथा वेतन रोकने की चेतावनी दी है।
शासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग में तैयारियां चल रही हैं। भारत सरकार द्वारा संचालित कर्मयोगी पोर्टल (आईगोट कर्मयोगी) पर सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण के लिए कई कोर्स चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में अब एलोपैथिक डाॅक्टरों के लिए भी एक विशेष वीडियो और स्टडी मैटेरियल अपलोड किया गया है।
सीएमएस के अनुसार पोर्टल पर एक महत्वपूर्ण वीडियो है, जिसमें मरीजों के साथ व्यवहार, नई गाइडलाइन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और मेडिकल एथिक्स से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं।
इसके साथ ही कुछ नोट्स भी दिए गए हैं, जिन्हें पढ़ना अनिवार्य है। वीडियो देखने और नोट्स पढ़ने के बाद पोर्टल पर ही ऑनलाइन परीक्षा होगी। इसमें बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाएंगे। सभी डॉक्टरों को उन सवालों का जवाब देना होगा।
जवाबों के आधार पर उन्हें नंबर मिलेंगे। कम से कम उन्हें 70 प्रतिशत अंक लाने होंगे। निर्धारित अंक लाने पर ही उन्हें आनलाइन प्रमाण पत्र जारी होगा। यह प्रमाण पत्र उनके वार्षिक ग्रेड और परफार्मेंस रिपोर्ट में जोड़ा जाएगा।
इसको लेकर जिला अस्पताल के सीएमएस ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि यह शासन की प्राथमिकता है और सभी डाक्टरों को समय पर कोर्स पूरा करना है। जो डाक्टर नहीं करेंगे, उनकी सूची शासन को भेजी जाएगी और उनका वेतन रोका जा सकता है।
व्यवहार सुधार और सरकारी योजनाओं की जानकारी को देनी होगी परीक्षा
कई बार मरीजों और तीमारदारों द्वारा डाक्टरों के रूखे व्यवहार की शिकायतें आती हैं। वीडियो में बताया गया है कि मरीज से कैसे बात करनी है, उसकी काउंसलिंग कैसे करनी है।
इलाज की नई गाइडलाइन, दवाओं के प्रोटोकाल, इमरजेंसी हैंडलिंग और संक्रमण से बचाव के नए नियमों की जानकारी देना। इसके अलावा आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना, टीबी उन्मूलन, मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाओं को धरातल पर कैसे लागू करना है, इसकी ट्रेनिंग भी शामिल है।
पहले यह ट्रेनिंग सिर्फ कागजों में होती थी। अब आनलाइन परीक्षा से यह तय होगा कि डाक्टर ने वास्तव में पढ़ा है या नहीं। इसका सीधा असर उनकी वार्षिक गोपनीय आख्या और प्रमोशन पर पड़ेगा।
शासन के निर्देश पर यह पढ़ाई अनिवार्य है और आनलाइन इसलिए और कर दी गई है, जिससे सभी डाक्टर यह पढ़ाई कर सकें और सवालों के जबाव दे सकें। तभी उन्हें सर्टिफिकेट मिलेगा। नहीं तो वेतन रोक दिया जाएगा।
- डाॅ. सतीश चंद्र नागर, सीएमएस जिला अस्पताल
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