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यूपी बोर्ड: 10वीं के छात्र ध्यान दें! विज्ञान और गृह विज्ञान में खत्म हुआ आंतरिक मूल्यांकन, अब बोर्ड लेगा 30 अंकों का प्रैक्टिकल

Published: Sat, 19 Sep 2026 06:32 PM (IST)

यूपी बोर्ड ने 10वीं के विज्ञान और गृह विज्ञान विषयों की परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब इन ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पैसे लेकर मनचाहे अंक देने वाले निजी स्कूलों पर कसेगी नकेल

जागरण संवाददाता, बदायूं। निजी स्कूलों द्वारा पैसे लेकर प्रैक्टिकल में मनचाहे नंबर बांटने की प्रथा पर अब यूपी बोर्ड नकेल कसने जा रहा है। बोर्ड ने 10वीं के छात्रों के लिए विज्ञान और गृह विज्ञान विषयों की परीक्षा प्रणाली में बड़ा संशोधन किया है। इसके तहत स्कूलों द्वारा दिया जाने वाला 30 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

अब बोर्ड स्वयं इन दोनों विषयों की 30-30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा आयोजित कराएगा, जिससे परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जा सके। यूपी बोर्ड द्वारा विनियमों में किए गए इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना और मेधावी छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है।

पूर्व व्यवस्था में स्कूल अपनी मर्जी से छात्रों को प्रैक्टिकल में पूरे नंबर दे देते थे, जिससे योग्य विद्यार्थियों का नुकसान होता था। अब नई व्यवस्था लागू होने से प्रैक्टिकल परीक्षा की प्रक्रिया और स्तर पूरी तरह से माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा तय किया जाएगा, जिससे निष्पक्षता बनी रहेगी।

अन्य विषयों के लिए प्रयोगात्मक कार्य का आंतरिक मूल्यांकन पांच प्वाइंट स्केल ग्रेडिंग के आधार पर होगा, जिसे अंकपत्र में दर्शाया जाएगा। हालांकि, पंजीकरण की प्रक्रिया जारी होने के कारण फिलहाल जिले के परीक्षार्थियों का अंतिम आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।

डीआईओएस लाल जी यादव ने बताया कि परिषद के निर्देशानुसार अब अन्य विषयों में ग्रेडिंग प्रणाली लागू रहेगी, लेकिन विज्ञान और गृह विज्ञान में 30 अंकों की परीक्षा बोर्ड खुद कराएगा। इसके प्राप्त अंक और ग्रेड सीधे अंकपत्र में दर्ज किए जाएंगे।

निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक, योग्यता को सम्मान

अब तक जिले के कुछ निजी स्कूल प्रयोगात्मक परीक्षा में अंक बढ़ाने के नाम पर अभिभावकों से तीन हजार रुपये तक वसूलते थे, और बेहतर प्रतिशत के लालच में अभिभावक भी पैसे दे देते थे।

हालांकि, नया नियम लागू होने के बाद आंतरिक मूल्यांकन की यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी, जिससे केवल मेधावी और योग्य विद्यार्थियों को ही उनकी क्षमता के आधार पर अंक मिलेंगे।

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