जागरण संवाददाता, बदायूं : दीपावली करीब आते ही इलेक्ट्रानिक और इलेक्ट्रिक उत्पाद का बाजार जगमग होने लगा है। बाजारों में रंग बिरंगी झालरों से दुकानें सजी नजर आ रही है। इस बार भी स्वदेशी झालरों की अधिक चमक दिखाई दे रही है। उनकी मांग बढ़ी है। हालांकि, 20 फीसद चाइनीज झालरें भी बाजार में उपलब्ध है लेकिन ग्राहक इन्हें खरीदने से परहेज कर रहे हैं।

दीपावली में कुछ वक्त है। बाजारों में त्योहार की तैयारियां तेज हैं। ऐसे में झालर और फैंसी लाइटों व बल्बों के थोक व फुटकर बाजार में सबसे ज्यादा दमक है। चीन सीमा पर तनाव का असर इस बार भी बाजार पर दिखाई दे रहा है। चीनी उत्पाद बहुत ही कम देखने को मिल रहे हैं। इस बार बाजार में 90 फीसद स्वदेशी झालरों की मांग बढ़ी है। जबकि पहले यह ठीक उलट रहता था। दुकानदारों की मानें तो उन्होंने चीनी झालरों को लाना पूरी तरह बंद है। बावजूद झालरों को थोक में खरीदने के बाद कुछ फीसद माल चीन की झालरों का भी सप्लाई कर दिया जाता है। दुकानदारों के मुताबिक, रोशनी से संबंधी अधिकांश लाइटें मेड इन दिल्ली से है। इनमे एलईडी, पिक्सल, राकेट शेप, झारना, स्टेप लाइटें, रनिग जैसी झालरें दीपावली पर घरों प्रतिष्ठानों को जगमग करने के लिए उपलब्ध है।

गांधी ग्राउंड स्थित दुकानदार संतोष सिंह चौहान और गौरव गुप्ता ने बताया कि स्वदेशी झालरों की डिमांड बढ़ी है। इस बार वह दिल्ली से स्वदेशी झालरें खरीदकर लाए है लेकिन, इन झालरों का 50 फीसद सामान चीन का है। वहीं, उत्पाद दिल्ली जैसे बड़े शहरों में हो रहा है। सदर में तकरीबन 60 लाख का कारोबार

व्यापारी नवनीत गुप्ता और गौरव गुप्ता बताते है कि सदर क्षेत्र में करीब 100 इलेक्ट्रनिक और इलेक्ट्रिक की दुकानें हीं। इसके अलावा फुटपाथ पर भी लोग झालरें आदि सजा लेते हैं। एक दुकानदार दीपावली पर अधिकतम 40 से 50 हजार की झालरें समेत रोशनी के अन्य सामान की बिक्री कर लेते है। ऐसे में सदर क्षेत्र में तकरीबन करीब 60 लाख से अधिक का कारोबार है।

ग्राहक बोले

चीन का माल टिकाऊ नहीं होता है। कोई गारंटी नहीं होती है, जबकि स्वदेशी माल मजबूत और टिकाऊ होता है। इसीलिए स्वदेशी झालरों को खरीदने में समझदारी है।

राज भारती, ग्राहक चीन हमारे देश का घोर विरोधी है। चीन के उत्पादों को खरीदना नहीं चाहिए। सभी लोगों को दीपावली पर स्वदेशी झालरों के साथ ही अन्य खरीदने चाहिए।

आशू, ग्राहक

Edited By: Jagran