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गंगा एक्सप्रेसवे: रंबल स्ट्रिप बनी हादसों की वजह! झपकी आते ही संभलने का मौका भी नहीं, 4 माह में 12 गाड़ियां पलटीं

Published: Sun, 13 Sep 2026 06:00 AM (IST)

गंगा एक्सप्रेसवे पर बदायूं में रंबल स्ट्रिप के गलत स्थान पर होने से हादसे बढ़ रहे हैं। पिछले चार महीनों ...और पढ़ें

गंगा एक्सप्रेसवे पर पूरे क्षेत्र में इसी तरह की थर्मोप्लास्टिक रंबल स्ट्रिप लगाई गई है। जागरण

गंगा एक्सप्रेसवे पर पूरे क्षेत्र में इसी तरह की थर्मोप्लास्टिक रंबल स्ट्रिप लगाई गई है। जागरण

HighLights

  1. किनारे की दीवार से एक फिट से भी कम दूरी पर बनी हैं छह इंच की रंबल स्ट्रिप

  2. झपकी लगने पर स्ट्रिप पर चढ़ता वाहन, लेकिन बचाव का नहीं मिल पाता मौका

अंकित गुप्ता, बदायूं। 29 अप्रैल को शुरू हुआ गंगा एक्सप्रेसवे बदायूं में हादसों का हब बनता जा रहा है। मई से सितंबर के बीच जिले में एक्सप्रेसवे पर 12 ऐसे हादसे हो चुके हैं, जिनमें चालक को झपकी आई और वाहन किनारे की दीवार या सेफ गार्डर से टकराकर पलट गया। वाहन चालकों को झपकी से बचाने के लिए एक्सप्रेसवे पर रंबल स्ट्रिप लगाई गई है, लेकिन इसकी स्थिति ही सवालों के घेरे में है।

यह स्ट्रिप किनारे की दीवार से एक फिट से भी कम दूरी पर बनी है। ऐसे में चालक को झपकी आने पर जब तक वाहन का पहिया रंबल स्ट्रिप पर पहुंचता है, तब तक वाहन दीवार के बेहद करीब पहुंच चुका होता है।

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प्रयागराज से मेरठ तक गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई 594 किमी है। इसमें 92 किमी हिस्सा बदायूं जिले में है, जो संभल से शाहजहांपुर की सीमा तक जाता है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के चौथे दिन से ही यहां हादसों का सिलसिला शुरू हो गया था।

इनमें लंबी दूरी तय करने वाले चालकों को झपकी आने से हुए हादसे भी शामिल हैं। एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव कम होने और मार्ग सुगम होने के कारण चालक लंबे समय तक लगातार वाहन चलाते हैं, जिससे झपकी लगने पर हादसे का खतरा बढ़ जाता है।

इसी खतरे को कम करने के लिए कार्यदायी संस्था एचजी इंफ्रा की ओर से थर्मोप्लास्टिक रंबल स्ट्रिप लगाई गई है। यह पांच से छह इंच चौड़ी है और सड़क के किनारे की दीवार से बमुश्किल एक फिट की दूरी पर है।

जानकारों के अनुसार, रंबल स्ट्रिप का इस्तेमाल सामान्यत: वाहन को लेन से भटकने से पहले सचेत करने के लिए किया जाता है। इसे किनारे से कुछ दूरी पर होना चाहिए, ताकि वाहन के स्ट्रिप पर पहुंचने के बाद चालक को संभलने का मौका मिल सके।

एनएचएआई से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार गंगा एक्सप्रेसवे पर रंबल स्ट्रिप का इस्तेमाल रोड मार्किंग की तरह किया गया है। किनारे की दीवार के बेहद पास होने के कारण झपकी आने पर चालक का वाहन स्ट्रिप तक पहुंचते-पहुंचते दीवार के करीब पहुंच जाता है।

चालक बचने के लिए अचानक स्टीयरिंग मोड़ता है तो वाहन असंतुलित होकर पलट सकता है। यदि स्ट्रिप दीवार से करीब दो फिट दूर होती तो चालक को वाहन संभालने के लिए कुछ अतिरिक्त समय मिल सकता था।

डीएम अवनीश राय ने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए यूपीडा के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है। हादसों को रोकने के लिए जो भी संभावनाएं होंगी, उन पर काम कराया जाएगा।

कई तरह की होती हैं रंबल स्ट्रिप

रंबल स्ट्रिप कई प्रकार की होती हैं। इनमें एबीएस, सिंथेटिक रबर, रिफ्लेक्टर पीवीसी और थर्मोप्लास्टिक रंबल स्ट्रिप शामिल हैं। गंगा एक्सप्रेसवे पर थर्मोप्लास्टिक रंबल स्ट्रिप का इस्तेमाल किया गया है।

वाहन के इनके ऊपर से गुजरने पर कंपन और गड़गड़ाहट की आवाज होती है, जिससे चालक के सतर्क होने की उम्मीद रहती है। इसकी कीमत करीब 350 से 550 रुपये प्रति मीटर बताई जाती है।

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