बदायूं में बड़ा राजनीतिक बदलाव: पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर ने छोड़ी भाजपा, साइकिल पर हुए सवार
बदायूं की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है, जहां दातागंज के पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य और बिसौली के पूर्व ...और पढ़ें

पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर सपा में शामिल। वीडियो से ली गई तस्वीर।
HighLights
सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर सपा में शामिल हुए
बदायूं की राजनीति में बड़ा बदलाव आया
आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा गहरा असर
जागरण संवाददाता, बदायूं। जिले की राजनीति में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। दातागंज से दो बार विधायक रहे सिनोद कुमार शाक्य और बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इसके अलावा म्याऊं ब्लाक प्रमुख के देवर केसी शाक्य भी सपा में शामिल हो गए। इन नेताओं के पाला बदलने से जिले में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर की सपा में एंट्री के पीछे अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियां रही हैं। सिनोद शाक्य बसपा से विधायक रहे, फिर सपा में आए और वर्ष 2022 में भाजपा में शामिल हो गए थे। वहीं, कुशाग्र सागर भाजपा के टिकट पर विधायक बने और पार्टी छोड़ने के बाद अब सपा में पहुंचे हैं।
पुराना है दलबदल का सिलसिला
सिनोद शाक्य की राजनीति में दलबदल का पुराना सिलसिला रहा है। वह वर्ष 2007 और 2012 में दातागंज से बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। वर्ष 2021 में सपा में शामिल हुए और उनकी पत्नी सुनीता शाक्य को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया गया, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत सकीं। वर्ष 2022 में सपा ने सिनोद को दातागंज से विधानसभा का टिकट नहीं दिया और कैप्टन अर्जुन सिंह यादव को प्रत्याशी बनाया।
इसके बाद विधान परिषद चुनाव में सपा ने सिनोद को प्रत्याशी बनाया, लेकिन उन्होंने नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे। अब करीब साढ़े चार साल बाद उनकी सपा में वापसी हुई है।
कुशाग्र सागर की सियासी शुरुआत भाजपा से हुई
वहीं कुशाग्र सागर की खुद की सियासी शुरुआत भाजपा से हुई। वर्ष 2017 में उन्होंने बिसौली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। वर्ष 2022 में सपा के आशुतोष मौर्य ने उन्हें 1834 मतों के अंतर से हरा दिया। कुशाग्र ने हाल ही में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। अपने संदेश में उन्होंने 11 साल तक संगठन से जुड़े रहने के बावजूद सम्मान और अपनापन नहीं मिलने की बात कही थी। बिसौली के मौजूदा सपा विधायक आशुतोष मौर्य की भाजपा नेताओं से नजदीकियों की चर्चाओं के बीच कुशाग्र के फैसले को क्षेत्र के बदलते राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया।
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दोनों जगह बनेंगे नए समीकरण
अब सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर दोनों के सपा में आने से दातागंज और बिसौली में पार्टी के भीतर नए समीकरण बनने की स्थिति है। दोनों पूर्व विधायकों की राजनीतिक पृष्ठभूमि और अपने-अपने क्षेत्रों में पुराने संपर्कों के कारण उनकी वापसी को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, दोनों के अगले चुनाव में टिकट के दावेदार होने या पार्टी की ओर से कोई जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
