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बदायूं में बिना परमिट दौड़ रहीं डग्गामार स्लीपर बसें: राम भरोसे दिल्ली-राजस्थान का सफर, स्लीपर केबिन से हो रही तस्करी! 

Published: Fri, 25 Sep 2026 10:06 PM (IST)

बदायूं की सड़कों पर बिना परमिट डग्गामार स्लीपर बसें अंतरराज्यीय दौड़ लगा रही हैं, जो यात्रियों को कम किराए में ...और पढ़ें

शहीद भगत सिंह चौकी के नजदीक स्लीपर बस पर बाइक चढ़ाते लोग। जागरण

शहीद भगत सिंह चौकी के नजदीक स्लीपर बस पर बाइक चढ़ाते लोग। जागरण

HighLights

  1. दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश तक दौड़ लगा रहीं स्लीपर बसें

जागरण संवाददाता, बदायूं। जिले की सड़कों पर इन दिनों डग्गामार स्लीपर बसों का कब्जा है। नियमों की अनदेखी करते हुए ये बसें बरेली, पीलीभीत से चलकर बदायूं होते हुए राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश तक दौड़ रही हैं। परिवहन विभाग की कार्रवाई के बावजूद इनका हौसला कम नहीं हुआ है और शाम होते ही जिले में इनके अड्डे सजने लगते हैं।

स्लीपर बसें बरेली और पीलीभीत से चलकर जिले से होते हुए जयपुर, जोधपुर, पानीपत, सोनीपत, आनंद विहार और बद्दी तक जाती हैं। कई बसें सीधे बदायूं से भी रवाना होती हैं। शहर में इनके तय अड्डे बने हुए हैं।

शहीद भगत सिंह चौकी के नजदीक बिसौली मार्ग पर शाम को इन बसों की लंबी कतार लग जाती है। यहां से यात्रियों को हिमाचल प्रदेश से लेकर आनंद विहार तक के लिए बैठाया जाता है। सुरक्षा का सवाल सबसे बड़ा है।

परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, इन बसों को इस तरह यात्रियों को ले जाने की अनुमति नहीं है। ये बसें कांट्रैक्ट पर बुक होने के बजाय डग्गामार वाहनों की तरह सड़कों पर यात्रियों को बैठाती हैं।

कई यात्रियों का कहना है कि इनमें से अधिकांश बसों के पास न तो परमिट है और न ही संचालन की अनुमति। इनके पंजीकरण भी अधिकतर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के हैं।

जानकारों का कहना है कि ऐसी बसों में तस्करी का भी काम होता है। शराब और अन्य नशीले पदार्थों को लाने-ले जाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है। चेकिंग के दौरान कई बार बसों के स्लीपर केबिन से अवैध माल बरामद हुआ है।

रोडवेज बसों की तुलना में ये डग्गामार बसें कम किराया वसूलती हैं। कम किराए और सीधे गंतव्य तक पहुंचाने के लालच में यात्री बिना सुरक्षा की परवाह किए इनमें सफर करने को मजबूर हैं।

रोडवेज से जयपुर का किराया 1200 रुपये है, जबकि ये स्लीपर बसें 800-900 रुपये में यात्रियों को ले जाती हैं। एआरटीओ विभाग ने पिछले छह माह में करीब सात बसों को सीज किया है और 16 बसों के चालान किए हैं। इसके बावजूद ये बसें आंखों में धूल झोंककर जिले से निकल रही हैं।

 

गुरुवार से चालान करने वाला ई-चालान एप बंद पड़ा है। इस कारण किसी भी वाहन का चालान नहीं हो पा रहा है। जानकारी में आया है कि शुक्रवार रात 12 बजे के बाद एप दोबारा शुरू होगा, उसके बाद वाहनों की लगातार चेकिंग की जाएगी। हालांकि इससे पहले भी बसों की चेकिंग होती आई है और कार्रवाई भी हुई है। इसमें लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी।

- हरिओम गौतम, एआरटीओ


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