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दवा से आ रही कमजोरी, पर 9 महीने से खाली हैं खाते... 7,250 TB मरीजों का पोषण भत्ता गायब, नया पेंच भी फंसा

Published: Tue, 15 Sep 2026 07:14 PM (IST)

बदायूं में 7,250 टीबी मरीजों को पिछले नौ महीने से 500 रुपये का पोषण भत्ता नहीं मिला है, जिससे दवा ...और पढ़ें

एआई इमेज है।

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HighLights

  1. दूध अंडा फल खाने से मरीजों को मिलती है ताकत, धनराशि के अभाव में केवल खा रहे दवा

जागरण संवाददाता, बदायूं। जिले में टीबी को हराने की जंग लड़ रहे 7,250 मरीजों के लिए सरकारी सिस्टम ही सबसे बड़ी बीमारी बन गया है। विभाग उन्हें रोज टाइम पर गोली तो खिला रहा है लेकिन गोली के साथ जो ताकत चाहिए, उसके लिए मिलने वाला 500 रुपया पोषण भत्ता पिछले नौ महीने से गायब है।

जनवरी से अब तक एक भी मरीज के खाते में एक रुपया नहीं आया। सरकार का नियम है कि जब तक टीबी का इलाज चलेगा, तब तक मरीज को हर महीने 500 रुपये मिलेंगे, जिससे वह दूध, अंडा, फल खा सके और शरीर में दवा से लड़ने की ताकत आ सके।

किसी का इलाज नौ महीने चलता है, तो किसी का 18 महीने लेकिन जिले में सब उल्टा हो रहा है। जनवरी से अगस्त तक जिले में 7,250 नए टीबी मरीज मिल चुके हैं। इनमें से कई तो ठीक होने की कगार पर हैं।

आधा इलाज पूरा हो चुका है लेकिन उनका खाता आज भी खाली है। अस्पताल में मिले एक मरीज ने बताया कि दवा खा-खाकर कमजोरी आ गई है। डाक्टर कहते हैं अंडा खाओ, दूध पियो। गरीब बस्तियों में हालत और बुरी है।

दवा तो फ्री है, पर खाली पेट दवा जहर लगती है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बजट नहीं आया है। अभी शासन स्तर से बजट अटका हुआ है। जैसे ही बजट आएगा कि एक साथ सभी के खातों में ट्रांसफर करा दिया जाएगा लेकिन कब आएगा, इसका कुछ पता नहीं है।

पिछले साल वाले 5,000 मरीज आज भी इंतजार में

यह कोई नया मामला ही नहीं है। पिछले साल के करीब पांच हजार मरीजों का भुगतान भी आज तक पूरा नहीं हुआ है। किसी को दो महीने का मिला, किसी को तीन महीने का, फिर फाइल अटक गई।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल से बजट का अभाव है। इससे मरीजों के खाते में रुपया नहीं पहुंच रहा है और यही कारण है कि वह जल्द ठीक नहीं हो रहे। केवल दवा खाने से उनके शरीर पर जल्दी असर नहीं हो रहा।

अब नया पेंच - चेहरा दिखाओ, तब पैसा पाओ

अब विभाग ने एक नया नियम और निकाल दिया है। अब क्षय रोगिरों को पैसा लेने के लिए फेस आथेंटिकेशन कराना होगा। आशा और सीएचओ घर-घर जाकर निक्षय मित्र ऐप पर मरीज की लाइव फोटो खींचेंगी, चेहरा वेरीफाई होगा, तब कहीं जाकर डीबीटी होगी।

अधिकारी इसे पारदर्शिता बता रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नेटवर्क न होने से और ऐप न चलने से भुगतान में और देरी हो रही है। मरीज कह रहे हैं कि लगातार उनको झूठा आश्वासन दिया जा रहा है।

 

अब बजट ही जारी नहीं हुआ है तो मरीजों को पैसा कहां से दिया जाए यह सबसे बड़ी मुश्किल है। अभी तो पिछले साल के ही तमाम मरीज अटके हुए हैं। जैसे ही बजट आता है कि पैसा ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

- डाॅ. विनेश कुमार, जिला क्षय रोग अधिकारी


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