विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UP Anemia Crisis: आगरा-प्रयागराज के बाद बदायूं बना 3rd सबसे प्रभावित जिला, 1,641 गर्भवती महिलाएं खतरे में

Published: Sun, 13 Sep 2026 12:00 AM (IST)

बदायूं जिले में 1,641 गर्भवती महिलाएं गंभीर एनीमिया से ग्रसित हैं, जिससे यह प्रदेश में तीसरा सबसे प्रभावित जिला बन ...और पढ़ें

एआई इमेज है।

एआई इमेज है।

HighLights

  1. नियमित निगरानी की कमी से बढ़ी जिले में एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की संख्या

आशीष देव मिश्रा, बदायूं। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की पोल खोलता चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। प्रदेश स्तरीय स्क्रीनिंग रिकाॅर्ड के अनुसार, जिले की 1,641 गर्भवती महिलाएं गंभीर एनीमिया से जूझ रही हैं। इस मामले में बदायूं प्रदेश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। वहीं पहले स्थान पर आगरा और दूसरे पर प्रयागराज है। यह स्थिति जच्चा-बच्चा दोनों की जिंदगी को प्रभावित कर रही है।

गर्भवती महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर हीमोग्लोबिन जांच से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार तक की व्यवस्था है।

इसके बावजूद इतनी संख्या में महिलाओं का इस बीमारी की चपेट में होना विभाग की लापरवाही को दर्शाता है, जो जिले के लिए चिंताजनक है। गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन की कमी से जान जोखिम में रहती है।

इससे गर्भस्थ शिशु का विकास भी प्रभावित होता है। बीमारी के यह आंकड़े विभागीय योजनाओं की पोल खोल रहे हैं। इसके प्रति स्वास्थ्य विभाग को सजग होने की जरूरत है।

बेहतर खानपान जरूरी

डाक्टरों के अनुसार, ग्रामीण गर्भवतियों को आर्थिक तंगी के कारण आयरन और प्रोटीनयुक्त भोजन नहीं मिल पाता है। केवल दवाएं बांटना काफी नहीं, बल्कि उनके नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, खान-पान पर भी नजर रखना जरूरी है। कुपोषण दूर करने के लिए योजनाओं के जरिए लगाई गईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के कामकाज की निगरानी भी आवश्यक है।

बीमारी से पीड़ित गर्भवतियों के मामले में प्रदेश के शीर्ष पांच जिले

रैंक जिला एनीमिया पीड़ित गर्भवतियों की संख्या
1 आगरा 1,885
2 प्रयागराज 1,717
3 बदायूं 1,641
4 बुलंदशहर 1,620
5 मेरठ 1,421

 

देहात क्षेत्र में आज भी महिलाओं में जागरुकता का अभाव है। वह सबसे बाद में खाना खाती हैं। गर्भवतियों के लिए यह नुकसान दायक है। आयरन की गोलियां खाने से भी अधिकांश महिलाएं हिचकतीं हैं। इस कारण बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी सामने आई है। लगातार जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को पोषक आहार अवश्य लेना चाहिए।

- डाॅ. राजवीर सिंह, नोडल अधिकारी, आरसीएच


यह भी पढ़ें- DU एडमिशन फर्जीवाड़ा: बरेली और बदायूं के बाद सिद्धार्थनगर से भी जुड़े तार, 16 फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बरामद