राखी बंधवाकर दिल्ली गए बदायूं के दो भाई हापुड़ हादसे में नहीं लौटे, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हापुड़ में हुए हादसे में बदायूं के सुखविंदर और जसवंत की मौत से उनके परिवार में मातम छा गया है। ...और पढ़ें
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HighLights
हापुड़ हादसे में बदायूं के दो भाइयों की दुखद मौत।
डेढ़ साल की बेटी और बीमार पिता हुए बेसहारा।
ग्रामीणों ने सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की।
जागरण संवाददाता, बदायूं। मेवली गांव के कच्चे घर की दहलीज पर बैठी डेढ़ साल की मासूम जयप्रभा को नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। वह बार-बार दरवाजे की ओर देखती है कि जैसे पूछ रही हो- पापा कहां हैं?
हम बात कर रहें हैं हापुड़ में हुए हादसे में जान गंवाने वाले सुखविंदर की, जिसकी तीन साल पहले शादी हुई थी। पिता होतीलाल को लगा था कि अब गरीबी के दिन कट जाएंगे। बेटा दिल्ली में कमाएगा, घर पक्का होगा, बेटी की शादी होगी। रक्षाबंधन पर दो दिन पहले जब दोनों बेटे घर आए तो कच्चे घर में पहली बार लंबे समय बाद हंसी गूंजी थी।
बहन आरती ने दोनों भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, लंबी उम्र की दुआ मांगी। किसे पता था, लेकिन ये आखिरी राखी होगी। मां सुनीता देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। बोलीं- दोनों मेरे सहारे थे। एक साथ दोनों चले गए, अब हम कैसे जिएंगे। बहन आरती राखी वाले हाथ को देखकर बेहोश हो जा रही है। बोली मैंने तो लंबी उम्र की कामना की थी, भगवान ने मेरे भाइयों को ही छीन लिया।
1.5 बीघा जमीन, कच्चा मकान और पैरालिसिस से पीड़ित पिता
होतीलाल के पास कुल डेढ़ बीघा जमीन है। खुद पैरालिसिस से पीड़ित हैं, चारपाई पर पड़े रहते हैं। घर की पूरी जिम्मेदारी सुखविंदर और छोटे भाई 18 वर्षीय जसवंत पर थी। दोनों भाई दिल्ली के अलीपुर में प्लास्टिक फैक्ट्री में 400-500 रुपये रोज पर मजदूरी करते थे। जो कमाते, घर भेज देते। उसी से राशन आता, दवा आती और बहन आरती की शादी के लिए थोड़ा-थोड़ा पैसा जोड़ा जा रहा था।
चार भाई-बहनों में सबसे बड़े थे देवेंद्र, परिवार की थी जिम्मेदार
हादसे में जान गंवाने वाले पालपुर निवासी 24 वर्षीय कल्लू उर्फ देवेंद्र भी शामिल थे। वह अपने परिवार में चार भाई बहनों में सबसे बड़े थे और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। वह भी दिल्ली में रहकर मजदूरी करते थे और अपने परिवार का पालन पोषण करते थे लेकिन उनकी मृत्यु से पूरा परिवार टूट गया है। इसी हादसे में पुरदलपुर निवासी जोगिंदर की भी मृत्यु हुई है। उनके घर में भी मातम पसरा हुआ है। लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
ग्रामीणों ने कहा- मदद करे जिला प्रशासन और सरकार
सोमवार जब दोनों भाइयों सुखविंदर और जसवंत के शव गांव पहुंचे तो पूरा गांव फूट-फूटकर रो पड़ा। उन्हें देखने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। उनकी चिताओं से उठते धुएं ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि दोनों भाइयों का परिवार बेहद गरीब हैं। जिला प्रशासन और सरकार को आर्थिक मदद करनी चाहिए, नहीं तो पैरालिसिस से पीड़ित पिता और डेढ़ साल की मासूम का भविष्य अंधकार में है। उनकी बहन घर में कुंवारी बैठी रहेगी।
