विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बदायूं में बड़ा राजस्व संकट: 150 हल्कों से लेखपालों ने छोड़ा चार्ज, ठप हुए आय-जाति और खतौनी के काम!

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:01 AM (IST)

बदायूं में लेखपालों ने 150 अतिरिक्त हल्कों का चार्ज छोड़ दिया है, जिससे आय, जाति और खतौनी जैसे महत्वपूर्ण राजस्व ...और पढ़ें

एआई इमेज

एआई इमेज

HighLights

  1. आय-जाति, निवास और खतौनी के काम रुके पड़े, तहसीलों में भटक रहे लोग, नहीं हो पा रहे काम

उमेश राठौर, बदायूं। जिले में लेखपालों की कमी और सात सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। जिले के सभी लेखपालों ने अपने अतिरिक्त हल्कों का चार्ज छोड़ दिया है। 150 से ज्यादा क्षेत्र अब लेखपाल विहीन हो गए हैं, जिनका जिम्मा अस्थायी तौर पर कानून-गो को भी सौंपा जा रहा है।

जिले में लेखपालों के कुल 458 पद यानी कार्य क्षेत्र स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 308 लेखपाल ही कार्यरत हैं। यानी 150 कार्यक्षेत्र पूरी तरह खाली हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए हर लेखपाल को 10 से 12 ग्राम पंचायतों तक का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया था।

लेखपाल संघ का कहना है कि वह पहले से ही ओवरलोड थे, वरासत, नामांतरण, पैमाइश, ई-गवर्नेंस, आपदा, चुनाव और कानून-व्यवस्था जैसे तमाम कामों का बोझ उन पर है। ऊपर से अतिरिक्त हल्कों का दबाव, बिना संसाधन के ग्राम सचिवालय में रोस्टर ड्यूटी और महीनों से भत्ते न बढ़ने से आक्रोश बढ़ गया।

इसी के चलते उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ शाखा बदायूं ने 22 सितंबर से अतिरिक्त हलकों के बहिष्कार का ऐलान किया था और सभी लेखपालों ने अपने अतिरिक्त हल्कों के बस्ते संबंधित तहसील और राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा कर दिए।

कानून-गो पर भी दोहरा बोझ

प्रशासन ने खाली हुए 150 हल्कों का चार्ज कानून-गो को देने की व्यवस्था शुरू की है लेकिन एक कानून-गो पर पहले से ही काफी काम है। कार्यों का पर्यवेक्षण भी करना है।

जांच और रिपोर्टिंग का जिम्मा है। अब गांव-गांव जाकर वरासत और प्रमाणपत्रों की जांच करना उनके लिए भी संभव नहीं हो रहा है। इससे राजस्व की पूरी चेन प्रभावित हो गई है।

तहसीलों में लग रही भीड़, लौट रहे लोग

लेखपालों के चार्ज छोड़ने का सीधा असर आय, जाति, मूल निवास, हैसियत, खसरा-खतौनी, खतौनी की नकल और वरासत के आवेदनों पर पड़ा है। जिले की सभी पांच तहसीलों बदायूं, बिसौली, दातागंज, सहसवान और बिल्सी में रोजाना सैंकड़ों लोग प्रमाणपत्रों के लिए पहुंच रहे हैं।

लेखपाल की रिपोर्ट न लगने से आवेदन तहसील स्तर पर ही लंबित हो रहे हैं। किसान अपनी जमीन की पैमाइश और नामांतरण के लिए महीनों से चक्कर काट रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लेखपाल नहीं मिल रहे और तहसील में बताया जा रहा है कि हल्का खाली है।

 

संघ का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि शासन का ध्यान अपनी वर्षों से लंबित न्यायोचित मांगों की ओर खींचना है। यदि कार्यों में देरी से जनता को असुविधा होती है तो उसकी जिम्मेदारी शासन और राजस्व परिषद की होगी। 12 सितंबर को मुख्य सचिव को डीएम के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया था लेकिन 45 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

- भोजराज सिंह यादव, जिलाध्यक्ष लेखपाल संघ

 

वर्षों से लेखपाल दोगुणा काम करते आ रहे हैं लेकिन अब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया। हमने अपना सात सूत्रीय मांग पत्र भी भेजा है। अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे सभी लेखपालों ने जो अतिरिक्त क्षेत्र संभाल रहे थे। उनका चार्ज छोड़ दिया है।

- कमल कुमार सिंह, जिला महामंत्री लेखपाल संघ

 

यह बड़ी समस्या है और प्रदेश स्तर पर लेखपालों से बात चल रही है। अनुमान है कि दो एक दिन में बातचीत हो जाएगी। उसके बाद कोई न कोई हल निकलकर सामने आए। लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। थोड़ा धैर्य बनाए रखें। इसी समस्या पर काम चल रहा है।

- मानवेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन


यह भी पढ़ें- बदायूं: ब्लैकमेलिंग और वीडियो वायरल करने की धमकी से परेशान युवती ने पिया तेजाब, इलाज के दौरान मौत