18 करोड़ का बजट आया, फिर भी 5500 मजदूरों की जेब खाली: बदायूं में पसीने की कमाई के लिए क्यों तरस रहे श्रमिक?
बदायूं में VB जीरामजी योजना के तहत 5,500 श्रमिकों को अपनी मेहनत की कमाई का इंतजार है, जबकि 14 अगस्त ...और पढ़ें

ग्राम पंचायत शंकरपुर में वीबी जीरामजी योजना तहत चल रहा मिट्टी सड़क कार्य। जागरण
HighLights
मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन में मजदूरी खाते में पहुंचना जरूरी, देरी पर विलंब मुआवजे का प्रावधान
जागरण संवाददात, बदायूं। जिले में वीबी जीरामजी योजना के तहत पसीना बहाने वाले करीब 5,500 श्रमिकों को महीनों बाद भी अपनी मेहनत कमाई का इंतजार है। हैरत की बात यह है कि शासन स्तर से 14 अगस्त को ही जिले के लिए 18 करोड़ 18 लाख 65 हजार 477 रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की जा चुकी है।
इसके बावजूद धनराशि श्रमिकों के बैंक खातों तक नहीं पहुंच सकी है। विभागीय अधिकारी प्रक्रिया चलने का दावा कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त बजट होने के बाद भी भुगतान अटकना कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नियमों के अनुसार, योजना में श्रमिकों की दैनिक हाजिरी मस्टर रोल में दर्ज होती है। कार्य अवधि पूरी होने पर इसे बंद कर दर्ज उपस्थिति के आधार पर मजदूरी की गणना की जाती है। कार्य का माप पूरा कर विवरण प्रबंधन सूचना प्रणाली में दर्ज होता है।
इसके बाद मजदूरी सूची तैयार व सत्यापित कर एफटीओ यानी फंड ट्रांसफर ऑर्डर जनरेट किया जाता है। अधिकृत अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर और द्वितीय स्तर की स्वीकृति मिलने के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया बैंक या डाकघर तक पहुंचती है।
इसके बाद डीबीटी के माध्यम से राशि सीधे खाते में भेजी जाती है। इस पूरी व्यवस्था में मस्टर रोल बंद होने की तारीख से अधिकतम 15 दिनों के भीतर मजदूरी खाते में पहुंचना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होता है, तो 16वें दिन से श्रमिकों को विलंब मुआवजा देने का स्पष्ट प्रावधान है।
नियमों के तहत देरी के प्रति दिन के हिसाब से बकाया मजदूरी का 0.05 प्रतिशत मुआवजा देय होता है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब बजट उपलब्ध है, तो मस्टर रोल बंद होने से लेकर एफटीओ स्वीकृति तक की प्रक्रिया में देरी किस स्तर पर हुई है।
श्रमिकों ने उठाया मुआवजे का मुद्दा
मजदूरी का इंतजार कर रहे श्रमिकों का कहना है कि उन्होंने काम पूरा कर दिया है, इसलिए भुगतान समय से मिलना चाहिए। उनका सवाल है कि यदि मस्टर रोल बंद होने के 15 दिन के भीतर मजदूरी नहीं मिली तो क्या उन्हें नियमानुसार विलंब मुआवजा भी दिया जाएगा।
साथ ही देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी। अब विभाग के सामने न केवल लंबित मजदूरी खातों में पहुंचाने, बल्कि निर्धारित समय-सीमा के उल्लंघन की स्थिति में मुआवजे और जिम्मेदारी को भी स्पष्ट करने की चुनौती है।
वीबी जीरामजी योजना शुरू होने के बाद श्रमिकों के खातों में आधार के आधार पर भुगतान किया जाना है। जिले में धनराशि आ चुकी है। सभी ब्लाकों से प्रत्येक श्रमिक की आवश्यक जानकारी मांगी गई है, लेकिन अभी पूरी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। इसी कारण भुगतान में देरी हो रही है।
- मनोज कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी
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