कभी लहलहाती थीं फसलें, अब सुरक्षा के डर से सिमटी बदायूं जेल की खेती; जानें चारदीवारी के पीछे का सच
बदायूं जिला कारागार की खेती कभी जेल की चारदीवारी के बाहर होती थी, लेकिन सुरक्षा कारणों और बंदियों के भागने ...और पढ़ें

जिला कारागार बदायूं
HighLights
सिविल लाइंस थाने के सामने और बराबर में स्थित है जेल की जमीन, अब वहां उग रही हैं झाड़ियां
जागरण संवाददाता, बदायूं। कहने को जिला कारागार के पास काफी जमीन है लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते अब वह जमीन बंजर पड़ी है। कभी इसी जमीन पर लहलहाती फसलें होती थीं और जेल के बंदी ही खेतीबाड़ी करते थे, लेकिन अब खेती सिमटकर सिर्फ जेल की चारदीवारी के अंदर तक रह गई है।
जिला कारागार के पीछे पोस्टमार्टम हाउस के पास की सारी जमीन जेल की ही है। आज से करीब 15-20 साल पहले तक यहां जेल प्रशासन की ओर से बाकायदा खेती कराई जाती थी।
जेल प्रशासन के पास अपना ट्यूबवेल था और दो बैल भी हुआ करते थे। बंदी उन्हीं बैलों से खेत की जोताई और बुआई करते थे। निराई-गुड़ाई से लेकर कटाई तक का सारा काम बंदी ही संभालते थे।
यहां गेहूं, धान, सरसों के साथ सबसे ज्यादा आलू की खेती होती थी। फसल भी अच्छी होती थी लेकिन दो बड़ी समस्याओं ने इस खेती पर ब्रेक लगा दिया। पहली समस्या थी शहर के आवारा सुअर, जो रात में आकर पूरी फसल को रौंद और खोद कर बर्बाद कर देते थे।
इससे जेल को हर साल नुकसान उठाना पड़ता था। दूसरी और सबसे बड़ी समस्या बनी सुरक्षा। खेत जेल की चारदीवारी के बाहर थे, इसलिए जब बंदियों को खेती के लिए बाहर ले जाया जाता था तो कई बार बंदी पुलिस को चकमा देकर भागने लगे।
एक-दो घटनाओं के बाद जेल प्रशासन ने बाहर खेती कराना ही बंद कर दिया। इसके बाद से बंदी भी हमेशा के लिए अंदर कैद हो गए और बाहर पड़ी कई एकड़ जमीन बंजर हो गई।
अब अंदर उग रही हैं सब्जियां
वर्तमान में जिला कारागार क्षमता से तीन गुणा ज्यादा बंदियों का भार झेल रहा है। जेल वैसे भी छोटी है, दीवारों के किनारे जो थोड़ी बहुत जगह बची है, वहीं अब साग-सब्जी उगाई जा रही है। इस समय जेल के अंदर मूली, पालक, धनिया और मिर्च की खेती कराई जा रही है।
बंदी ही इसकी देखभाल करते हैं। हालांकि अंदर उगने वाली सब्जी जेल के 1,000 से ज्यादा बंदियों के लिए नाकाफी है। इसलिए ज्यादातर सब्जियां सेंट्रल जेल बरेली से मंगाई जा रही हैं। उन्हीं सब्जियों से बंदियों का पेट भर रहा है।
नई जेल बनी तो बदलेगी तस्वीर
जेल प्रशासन को अब नई जेल के निर्माण से उम्मीद है। नई जेल के लिए काफी जगह आवंटित है और वहां निर्माण होने के बाद जगह की कमी खत्म हो जाएगी।
अधिकारियों का मानना है कि नई जेल बनने के बाद चारदीवारी के अंदर ही इतनी जगह होगी कि बंदी आराम से बड़े पैमाने पर सब्जियां उगा सकेंगे। इससे जेल आत्मनिर्भर भी बनेगी और बंदियों को काम भी मिलेगा, साथ ही बाहर भागने का खतरा भी नहीं रहेगा।
इस समय जेल के अंदर पालक, मूली, धनिया और मिर्च हो रही है। इससे ही बहुत काम चल रहा है। जब पालक की सब्जी बनती है तो उसे खरीदने की जरूरत नहीं है और इसको बंदर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। अगर सुरक्षा की बात हो तो जेल के पास अपनी ही जमीन बहुत है। बाकी सेंट्रल जेल बरेली से सब्जी आती है।
- राजेंद्र कुमार, जेल अधीक्षक
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