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'डॉक्टर-अफसर बनने का सपना, पर शौचालय तक नहीं'... बदायूं के सरकारी स्कूलों में नौनिहालों का दर्द

Published: Tue, 13 Oct 2026 04:56 PM (IST)

बदायूं के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जहां बच्चे जर्जर इमारतों में और शौचालय के बिना पढ़ने ...और पढ़ें

शहर के हल्का नंबर एक स्थिति प्राथमिक विद्यालय में चटाई पर बैठकर पढ़ते बच्चे। जागरण

शहर के हल्का नंबर एक स्थिति प्राथमिक विद्यालय में चटाई पर बैठकर पढ़ते बच्चे। जागरण

HighLights

  1. शौचालय के अभाव में पड़ोसियों के घर जाने को मजबूर हैं छात्राएं

  2. जिम्मेदारों की अनदेखी से जर्जर इमारतों में चल रहे शहर के स्कूल

आशीष देव मिश्रा, बदायूं। जिन नन्हीं आंखों में अफसर और डाॅक्टर बनने के सपने तैरते हैं, वे नौनिहाल जर्जर स्कूलों में जमीन पर बैठकर अपने स्वर्णिम भविष्य का सपना संजो रहे हैं। विभाग कागजों पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की चाहे जितनी ढींगे हांक ले, लेकिन धरातल पर हकीकत सिफर है।

प्रभारी मंत्री के अपने ही प्रभार क्षेत्र में बच्चे न केवल बुनियादी सुविधाओं के लिए मोहताज हैं, बल्कि जर्जर दीवारों के साये में पढ़ने को भी मजबूर हैं। दैनिक जागरण टीम ने मंगलवार को शहर के कबूलपुर, शहवाजपुर, हल्का नंबर एक और सराय फकीरी के परिषदीय विद्यालयों की पड़ताल की।

पड़ताल में सामने आया कि शहरी क्षेत्र के 23 प्राथमिक विद्यालय और तीन उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब पांच हजार विद्यार्थियों को स्कूल में मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

किसी स्कूल में बच्चे टीन शेड के नीचे बिछी टाट पट्टियों पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे तो कहीं सालों से जर्जर हुए स्कूल में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।

शिक्षकों का कहना है कि सर्दियों में बच्चों को नीचे बैठने में परेशानी होती है। इसलिए सर्दियों के दिनों में बच्चों को ठंड से बचाने के लिए जमीन पर गद्दे बिछवाने पड़ते हैं।

स्कूलों में शौचालय न होने के कारण उन्हें मजबूरन आसपास के पड़ोसियों के घरों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है। यह व्यवस्थाएं तब हैं जब शहर में सत्ताधारी पार्टी के विधायक हैं। यहां तक की प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार अरुण कुमार सक्सेना का प्रभार क्षेत्र है।

दृश्य:1-: प्राथमिक विद्यालय शहवाजपुर

प्राथमिक विद्यालय शहवाजपुर में जमीन पर बैठकर पढ़ते नौनिहाल। जागरण

शहर के शहवाजपुर की छोटी सी गली में यह स्कूल जर्जर अवस्था में है। यहां न तो बच्चों के लिए बैठने के लिए फर्नीचर है और न ही शौचालय की व्यवस्था। बच्चे जमीन पर बैठकर ही पढ़ने को मजबूर हैं। इस स्कूल में कुल 62 बच्चे पंजीकृत हैं। जहां दो शिक्षकों की तैनाती है।

दृश्य:2 -: प्राथमिक विद्यालय हल्का नंबर एक

हल्का नंबर एक के प्राथमिक विद्यालय की दीवारें जर्जर हैं। बच्चे टीन शेड के नीचे बैठाकर पढ़ रहे है। इस स्कूल में बच्चों के लिए शौचालय तक नहीं है। बच्चियां पड़ोस के मकान में शौच को जाने को मजबूर हैं।

दृश्य:3 -: प्राथमिक विद्यालय कबूलपुरा

शहर में कबूलपुरा स्थिति प्राथमिक विद्यालय में ज़मीन पर बैठे बच्चे। जागरण

कबूलपुर का प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के सर को ढकने को केवल एक छप्पर पड़ा हुआ है। शिक्षक का कहना यह स्कूल किराए का है। स्कूल के लिए जगह ढूंढी जा रही है उसके बाद स्कूल को वहां शिफ्ट किया जाएगा तब ही सुधार हो सकेगा।

दृश्य:4 -: प्राथमिक विद्यालय सराय फकीरी

शहर के सराय फकीरी स्थित प्राथमिक विद्यालय में जमीन पर बैठकर पढ़ते विद्यार्थी। जागरण

शहर के सराय फकीरी क्षेत्र में एक कमरे पूरा स्कूल संचालित है। वहीं एमडीएम का भोजन बनता है। साथ ही एक ही कमरे में पांच-पांच कक्षाएं लग रही हैं। साथ ही न बच्चों को बैठने की कोई व्यवस्था है। जमीन पर बैठकर की बच्चे शिक्षा का ककहरा सीख रहे हैं।

 

शहर में जो स्कूल किराए के भवनों में संचालित हैं। उनके लिए नगर पालिका से बातचीत कर जगह चिह्नित की जा रही है। जमीन मिलते ही स्थाई स्कूल के निर्माण हो सकेगा।

- नवीन कुमार, बीएसए


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