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बदायूं में गोवंश के नाम पर बड़ा खेल: 67 गोशालाएं बंद, फिर भी कागजों पर पल रहीं गायें और उठ रहा बजट

Published: Sun, 16 Aug 2026 04:20 PM (IST)

बदायूं में गोवंश संरक्षण योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया है, जहां 67 बंद गोशालाओं और बिना टैग ...और पढ़ें

बदायूं के बादल गांव की गोशाला फाइल फोटो

बदायूं के बादल गांव की गोशाला फाइल फोटो

HighLights

  1. बिना टैग के पशुओं पर भी हो रहा भुगतान, कई गोशालाओं में बिना टैग के पशु

जागरण संवाददाता, बदायूं। राज्य सरकार गोवंश संरक्षण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जिले में इस योजना का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। आरटीआई से पता चला है कि जिले में पहले 317 गोशालाएं थीं, अब सिर्फ 250 ही संचालित हैं। यानी 67 गोशालाएं बंद हो चुकी हैं।

सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा यह है कि जो गोशालाएं सालों पहले बंद हो गईं, उनके नाम पर आज भी कागजों में गोवंश संरक्षण दिखाकर चारा, भूसा और रख-रखाव का पैसा निकाला जा रहा है।

नियम के मुताबिक, हर गोवंश के कान में पहचान टैग लगा होना अनिवार्य है। बिना टैग के पशु का भुगतान नहीं हो सकता लेकिन जांच में सामने आया कि कई संचालित गोशालाओं में बिना टैग वाले पशु रखे गए हैं और उन्हें भी गिनती में दिखाकर धनराशि हड़पी जा रही है।

तीन दिन पहले बादल गांव की गोशाला में गंदगी और चार पशुओं की मौत के बाद हुई जांच में भी कई पशु बिना टैग के मिले। पता ही नहीं कि यह पशु कहां से आए और कब लाए गए। इसके बावजूद उनके नाम पर हर महीने भुगतान किया जा रहा है।

अधिकारियों की मिलीभगत के चलते यह गड़बड़ी लगातार चल रही है। गोवंश संरक्षण योजना का मकसद बेसहारा गायों को आश्रय देना था, लेकिन भ्रष्टाचार के चलते यह योजना सिर्फ फाइलों तक सिमट गई है। शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कागज में 120, मौके पर 47 दातागंज

क्षेत्र की एक गोशाला में औचक निरीक्षण हुआ था। रजिस्टर में 120 गोवंश दर्ज थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 47 पशु मिले। बाकी 73 पशु कागजों में ही जिंदा थे और उनके नाम पर हर महीने भुगतान हो रहा था। टीम ने रिकार्ड जब्त कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अधिकारी और संचालक मिलकर सरकारी धन डकार रहे हैं।

भगवतीपुर में खत्म गोशाला में 78 गायें, 1.20 लाख का भुगतान

सालारपुर ब्लाॅक के गांव भगवतीपुर में तो हद ही हो गई। यहां गोशाला कई साल पहले ही खत्म हो चुकी है। अब वहां एक भी पशु नहीं है। लेकिन विभागीय अभिलेखों में आज भी भगवतीपुर की गोशाला चल रही है। कागजों में यहां 78 पशुओं का संरक्षण दिखाकर हर महीने 1.20 लाख रुपये निकाले जा रहे हैं। हैरानी की बात है कि ग्राम पंचायत सचिव लगातार इन गायों के संरक्षण पर मुहर भी लगा रहा है।

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