गंगा-रामगंगा का जलस्तर बढ़ा: 15 गांव डूबे, सकतपुर बना टापू, खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदी
गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर बढ़ने से बदायूं के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है, जहां ...और पढ़ें

कदम नगला गांव में ग्रामीणों की झोपड़ी में घुसा बाढ़ का पानी। जागरण
HighLights
रामगंगा की दो धाराओं के बीच फंसा सकतपुर, कई गांवों का संपर्क प्रभावित, नाव-स्टीमर उतारे, पुलिस भी तैनात
संवाद सहयोगी, सहसवान/दातागंज/उसहैत/कछला (बदायूं)। गंगा और रामगंगा में बढ़ते जलस्तर से जिले के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। गंगा का पानी जहां सहसवान और उसहैत क्षेत्र के गांवों की आबादी तक पहुंच गया है, वहीं रामगंगा की बाढ़ से हजरतपुर क्षेत्र में कई रास्ते जलमग्न हो गए हैं। सकतपुर गांव रामगंगा की दो धाराओं के बीच फंसकर टापू में तब्दील हो गया है। दोनों नदियों की बाढ़ से ग्रामीणों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है।
शनिवार को नरौरा बैराज से गंगा में 1,34,584 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे कछला में गंगा का मीटर गेज बढ़कर 162.55 मीटर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 162.40 मीटर से 15 सेंटीमीटर अधिक है। जलस्तर बढ़ने से कछला गंगा घाट पर कांवड़ यात्रियों के स्नान के लिए जाने वाले रास्ते में पानी भर गया है।
घाट पर दुकान लगाने वालों ने सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। तट पर रोशनी के लिए लगाए गए लाइटों के पोल भी पानी में डूबने लगे हैं।

सहसवान क्षेत्र के भमरौलिया, खागी नगला, वीर सहाय नगला, तौफी नगला और तेलिया नगला में निचले स्थान और संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। तौफी नगला में गंगा के कटान से करीब 50 मीटर कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। वीर सहाय नगला के पास शुरू हुआ कटान फिलहाल थमा हुआ है। बाढ़ खंड और तहसील प्रशासन के कर्मचारी क्षेत्र में कैंप कर स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
उसहैत क्षेत्र के कदमनगला में भी बाढ़ का पानी आबादी तक पहुंच गया है। कई घर जलमग्न होने के कारण ग्रामीण जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जा रहे हैं। गांव का बड़ा हिस्सा कटान की चपेट में आ चुका है और करीब एक दर्जन मकान गंगा में समा चुके हैं।
कई परिवार गांव छोड़कर सुरक्षित स्थानों या रिश्तेदारियों में चले गए हैं, जबकि करीब 30 लोग अभी गांव में रुके हुए हैं। प्रशासन ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शरणस्थल बनाया है। ग्रामीणों को दो बार राशन वितरित किया जा चुका है और स्वास्थ्य कैंप भी लगाया गया है।
रामगंगा ने काटे रास्ते, सकतपुर बना टापू
हजरतपुर क्षेत्र में रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से हर्रामपुर से गढ़िया रंगीन जाने वाले मार्ग पर करीब दो फीट पानी बह रहा है। इससे बड़े वाहनों का आवागमन बंद है। जरटोली, सिमरिया, मौसमपुर और आनंदपुर समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

सकतपुर गांव रामगंगा की दो धाराओं के बीच फंस गया है। गांव का संपर्क लगभग कट गया है और ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान जुटाने में परेशानी हो रही है। एसडीएम दातागंज विनोद कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी स्टीमर और नाव लगाई गई हैं।
कई स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग के कैंप लगाए जा रहे हैं और राहत सामग्री भी वितरित की जा रही है। वहीं एसडीएम सहसवान गौरव आर्या ने बाढ़ चौकियों और बाढ़ खंड के कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
कदमनगला में कटान से बदली गांव की तस्वीर
कदमनगला में गंगा के कटान ने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। नदी लगातार गांव की ओर बढ़ रही है। घरों के आसपास पानी पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने सोलर पैनल और बिजली के उपकरण तक उतारकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने शुरू कर दिए हैं।

शनिवार को अमित यादव के घर तक बाढ़ का पानी पहुंच गया। गंगा का जलस्तर बढ़ने का असर जटा गांव के संपर्क मार्ग पर भी पड़ा है। मार्ग पर घुटनों तक पानी भर गया है।
इसके बावजूद ग्रामीण मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर के सहारे आवागमन कर रहे हैं। पानी बढ़ने से ग्रामीणों को गांव से बाहर निकलने और जरूरी सामान लाने में परेशानी हो रही है।
तीन बैराजों से छोड़ा गया 3.26 लाख क्यूसेक पानी
शनिवार को नरौरा बैराज से 1,34,584, बिजनौर बैराज से 99,406 और हरिद्वार से 92,870 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। तीनों स्थानों से कुल 3,26,860 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा के जलस्तर में आने वाले घंटों में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है।
हालांकि बिजनौर और हरिद्वार से पानी छोड़े जाने की मात्रा कम होने तथा पहाड़ों पर बारिश थमने की स्थिति में अगले एक-दो दिन में बाढ़ का प्रकोप कम होने की उम्मीद है।
यह भी पढ़ें- मेरठ-बदायूं हाईवे पर दो बाइकों की भिड़ंत में 30 वर्षीय प्रदीप की मौत, 2 मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
