दिवाली पर रंग-बिरंगी मिठाई खाना पड़ ना जाए भारी, रोडामाइन-बी का धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल
बदायूं में दीपावली से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाइयों में हानिकारक रंगों के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ा दी है। ...और पढ़ें

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HighLights
मिठाइयों में हानिकारक रंगों के प्रयोग पर विभाग सख्त।
रोडामाइन-बी जैसे औद्योगिक रंगों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया।
दुकानदारों को रंगों के बिल, बैच नंबर रखने होंगे सुरक्षित।
जागरण संवाददाता, बदायूं। दीपावली पर बाजार में सजी चमकीली मिठाइयां देखने में जितनी आकर्षक लगती हैं, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती हैं। इसी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने रंगों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। अब मिठाई में मनमर्जी से रंग डालने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई होगी।
विभाग ने साफ कर दिया है कि खाद्य पदार्थों में केवल अनुमन्य रंगों का ही निर्धारित सीमा के भीतर इस्तेमाल हो सकेगा। रोडामाइन-बी समेत सभी गैर-खाद्य रंगों पर पूरी तरह रोक रहेगी।
नए निर्देश मिठाई की दुकानों, होटलों, रेस्टोरेंट और औद्योगिक उत्पादन इकाइयों सभी पर लागू होंगे। टमाटर, चुकंदर, धनिया, पुदीना, मिठाई जैसे खाद्य पदार्थों में स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले रंगों का प्रयोग प्रतिबंधित किया गया है।
त्योहारों को देखते हुए विभाग ने छह टीमें गठित की हैं। टीमें दुकानों पर जाकर यह जांच कर रही हैं कि कहीं अंजता और बुश जैसे कंपनी के रंगों की जगह लोकल और सस्ता रंग तो नहीं डाला जा रहा, और उसकी मात्रा कहीं ज्यादा तो नहीं है। 8 से 15 अक्टूबर के बीच ही 23 सैंपल लिए जा चुके हैं। यह जांच दीपावली तक लगातार चलेगी।
डॉक्टर बोले- रोडामाइन-बी है नुकसानदायक
जिला अस्पताल के डॉ. नितिन कुमार सिंह ने बताया कि रोडामाइन-बी एक औद्योगिक रंग है, जिसका इस्तेमाल कपड़े, कागज और प्लास्टिक को रंगने में होता है। यह खाद्य रंग बिल्कुल भी नहीं है।
लंबे समय तक इसके सेवन से लीवर, किडनी को नुकसान, एलर्जी, पेट की बीमारी और कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। ज्यादा सिंथेटिक रंग बच्चों में हाइपरएक्टिविटी, चिड़चिड़ापन, त्वचा पर दाने और पाचन की समस्या भी पैदा कर सकते हैं।
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अब बिल और बैच नंबर रखना होगा सुरक्षित
नए नियमों के अनुसार दुकानदारों को केवल अधिकृत स्रोतों से ही रंग खरीदने को कहा गया है और खरीदारी समय पैकेजिंग, लेबल और आपूर्तिकर्ता के विवरण की जांच करना जरूरी होगा।
रंगों के खरीद बिल, इनवाइस और बैच नंबर को सुरक्षित रखना होगा, जिससे जांच के दौरान यह पता चल सके कि रंग कहां से आया और कितना इस्तेमाल हुआ। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दुकानदारों को ये रिकार्ड कम से कम एक साल तक सुरक्षित रखने होंगे।
अब रंगों को लेकर ज्यादा सख्ती है। कोई भी दुकानदार सिंथेटिक रंग प्रयोग नहीं कर सकते। वह अंजता और बुश कंपनी के ही रंग ले सकते हैं। उसका भी बिल आदि सुरक्षित रखना पड़ेगा। चेकिंग के दौरान उसे दिखाना होगा।
सीएल यादव, सहायक खाद्य आयुक्त
