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बैन के बावजूद आसमान में उड़ रहा 'कातिल मांझा': कट रहे परिंदों के पर, वन विभाग के सेंटर में तड़प रहीं चीलें

Published: Tue, 13 Oct 2026 05:59 PM (IST)

बदायूं में प्रतिबंधित मांझे की बिक्री जारी है, जिससे पक्षी गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। वन विभाग के ...और पढ़ें

बदायूं के बारापत्थर के फौजी पड़ाव में वन विभाग के सेंटर में घायल चील। जागरण

बदायूं के बारापत्थर के फौजी पड़ाव में वन विभाग के सेंटर में घायल चील। जागरण

HighLights

  1. छापेमारी के दावों के बीच बाजार में बिक्री पर अंकुश नहीं, इंसानों की जान पर भी मंडरा रहा खतरा

जागरण संवाददाता, बदायूं। प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर रोक है, लेकिन बाजार में इसकी उपलब्धता पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। शहर के बाजारों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानों तक चोरी-छिपे बिक रहे इस मांझे की धार बेजुबान पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

पतंगबाजी के शौक और दुकानदारों के मुनाफे की कीमत चील, बाज और कबूतर जैसे पक्षियों को चुकानी पड़ रही है। सवाल यह है कि प्रतिबंध के बावजूद इसकी बिक्री कैसे जारी है और जिम्मेदारों की कार्रवाई का असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा।

पिछले एक माह में प्रतिबंधित मांझे में उलझकर घायल होने वाले पक्षियों के मामले बढ़े हैं। वन विभाग के अनुसार, रोजाना कम से कम एक घायल पक्षी का रेस्क्यू किया जा रहा है।

इन्हें उपचार के लिए बारापत्थर स्थित फौजी पड़ाव में बनाए गए वन विभाग के अस्थायी सेंटर पर पहुंचाया जाता है। वर्तमान में यहां आठ से 10 घायल चीलों का उपचार चल रहा है।

कई चीलों के पंख बुरी तरह कट गए हैं, जबकि कुछ की गर्दन और पैरों में गहरे घाव हैं। समय पर उपचार न मिलने पर इनकी जान भी जा सकती है। प्रतिबंधित मांझा सामान्य धागे की तुलना में अधिक मजबूत और धारदार होता है।

पेड़ों और बिजली के तारों पर लंबे समय तक लटका रहने वाला यह मांझा उड़ते पक्षियों के लिए फंदा बन जाता है। इसमें उलझने के बाद पक्षियों के पंख और शरीर के अन्य हिस्से जख्मी हो जाते हैं।

यही मांझा सड़क पर चलने वाले लोगों और बाइक सवारों के लिए भी गंभीर खतरा है। पूर्व में जिले में बाइक सवारों के गले में मांझा उलझने से चोट लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।

छापेमारी के दावों के बीच बिक्री पर सवाल

एसडीओ वन विभाग जगन्नाथ कश्यप ने बताया कि प्रतिबंधित मांझे को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। छापेमारी भी कराई जाती है और जहां प्रतिबंधित मांझा मिलता है, वहां संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने लोगों से प्रतिबंधित मांझे का प्रयोग न करने और सूती मांझे का इस्तेमाल करने की अपील की। कहीं इसकी बिक्री होते दिखे तो वन विभाग या स्थानीय पुलिस को सूचना दें, ताकि संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

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