बदायूं की गोशालाओं में गोवंशों की मौत से हड़कंप: एनजीओ से छीना संचालन, कई जगह ब्लैकलिस्ट की तैयारी
बदायूं के सलारपुर और वजीरगंज ब्लाक की गोशालाओं में गोवंशों की मौत और बदहाली के बाद प्रशासन ने सख्त कदम ...और पढ़ें
HighLights
पेपल में चार गोवंशों की मौत के बाद प्रशासन ने कसा शिकंजा, भूसा-पानी से लेकर चारे और उपचार तक की व्यवस्था दुरुस्त
संवाद सूत्र, सिलहरी/बगरैन (बदायूं)। गोशालाओं में गोवंशों की देखभाल के नाम पर चल रही व्यवस्थाओं की पोल खुलने के बाद प्रशासन ने अब जिम्मेदारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सलारपुर ब्लाक के बादल स्थित गोशाला में गोवंशों की बदहाली और पांच गोवंशों की मौत की पुष्टि के बाद मंगलवार को भी प्रशासनिक कार्रवाई जारी रही।
खंड विकास अधिकारी नितिन कुमार ने लगातार दूसरे दिन गोशाला पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जांच के दौरान परिसर में दलदल और कीचड़ में गोवंशों के रहने की स्थिति सामने आने पर जेसीबी से दलदल हटवाकर मिट्टी डलवाई गई। साथ ही गोशाला के संचालन का जिम्मा दानवीर जन कल्याण सेवा समिति से हटाकर ग्राम प्रधान वीरेश यादव को सौंप दिया गया।

बादल की गोशाला में कार्रवाई यहीं तक सीमित नहीं रही। निरीक्षण के दौरान एक गोवंश की हालत गंभीर मिलने पर पशु चिकित्सक डा. संजीव भूरियार को मौके पर बुलाकर उपचार कराया गया। वहीं, मृत मिले एक गोवंश को जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर दफन कराया गया। खंड विकास अधिकारी ने बताया कि अब तक पांच गोवंशों की मौत की पुष्टि हुई है।
पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जा रही है। गोवंशों की मौत और व्यवस्थाओं में लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित एनजीओ को ब्लैकलिस्ट करने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। बादल की गोशाला में सामने आई बदहाली के बाद प्रशासन ने ब्लाक सलारपुर की अन्य गोशालाओं की स्थिति भी परखी।
सोमवार को मामला सामने आने के बाद खंड विकास अधिकारी नितिन कुमार गांव बनेई और रसूलपुर पुठी स्थित गोशालाओं में पहुंचे। निरीक्षण में वहां भी व्यवस्थाओं में खामियां मिलीं। बनेई की गोशाला में भी गोवंशों के लिए दलदल की स्थिति सामने आई। यहां सौ से अधिक गोवंश संरक्षित हैं।

इसके बाद दोनों गोशालाओं का संचालन भी एनजीओ से हटाकर ग्राम प्रधानों को सौंपने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। बताया गया कि ब्लाक की सभी गोशालाओं का संचालन दानवीर जन कल्याण सेवा समिति के माध्यम से किया जा रहा था।
बादल की गोशाला में गोवंशों की बदहाली सामने आने के बाद अधिकारियों ने अन्य गोशालाओं का भी मौके पर जाकर निरीक्षण किया। कार्रवाई से यह साफ है कि अब प्रशासन केवल एक गोशाला की व्यवस्था सुधारने के बजाय एनजीओ के माध्यम से संचालित सभी गोशालाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा के मूड में है। इससे गोवंशों की देखभाल में लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद बढ़ी है।
पेपल में चार गोवंशों की मौत के बाद बदली व्यवस्था
वजीरगंज ब्लाॅक के ग्राम पेपल स्थित गोशाला में भी सोमवार को चार गोवंशों की मौत के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। ग्रामीणों और भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष मुकेश भदौरिया ने गोशाला में पर्याप्त भूसा, हरा चारा और शुद्ध पानी नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों को सूचना दी थी।
सूचना पर एसडीएम बिसौली प्रियंका गोयल, वीडीओ वजीरगंज, थानाध्यक्ष, नायब तहसीलदार और क्षेत्रीय लेखपाल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने मृत गोवंशों की स्थिति के साथ भूसा, चारा, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था देखी। निरीक्षण में मिली खामियों पर एसडीएम ने संबंधित कर्मचारियों और प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई।

मृत गोवंशों को तत्काल दफनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही गोशाला की व्यवस्था ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के सुपुर्द कर दी गई। एनजीओ प्रभारी द्वारा पूर्व में हटाए गए केयरटेकर को भी दोबारा देखरेख की जिम्मेदारी दी गई। अधिकारियों की सख्ती का असर मंगलवार को गोशाला में दिखाई दिया।
पर्याप्त भूसा और शुद्ध पानी की व्यवस्था कराई गई। भविष्य में हरे चारे की कमी न हो, इसके लिए ग्राम प्रधान ने ग्राम समाज की जमीन पर चारे की बुवाई शुरू करा दी। बीमार गोवंशों का पशु चिकिक ने मौके पर पहुंचकर उपचार किया। बिना इयर टैग वाले गोवंशों की पहचान कर उनके इयर टैग भी लगाए गए। पशु चिकित्सक के अनुसार गोशाला में वर्तमान में 83 गोवंश हैं और उनकी देखरेख की जा रही है।
