जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : शिल्पदेव बाबा विश्वकर्मा की पूजा को लेकर रविवार को शहर में दुकानों को साफ-सुथरा कर तैयारियां पूरी कर ली गईं। पूजा की तैयारी को लेकर बाजार में खरीदारों की भीड़ लगी रही। बाबा विश्वकर्मा की पूजा जिला के तकनीकी संस्थानों, मोटर गैराजों वाहन के एजेंसियों सहित काष्ठशिल्पियों द्वारा प्रमुख रूप से की जाती है। कई संस्थानों द्वारा बाबा विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है। वहीं विभिन्न संस्थाओं द्वारा इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

विश्वकर्मा पूजा को लेकर बाजारों में विशेष चहल पहल देखी गई। बाजार में पूजा सामग्री व सजावट के सामानों की कई दुकानें लगाई गई थी। पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर देर रात तक बाजार गुलजार रहा। इस दौरान लोगों ने मुख्य चौक, सिधारी, मातबरगंज व रेलवे स्टेशन रोड स्थिति सजी दुकानों से भगवान विश्वकर्मा के चित्र व प्रतिमा की खरीदारी की गई। साथ ही पूजा-अर्चना को लेकर सजावट के सामानों की भी जमकर खरीदारी हुई। शिल्पी विश्वकर्मा की पूजा विशेष तौर पर की जाती है। लोग अपने वाहनों सहित उपकरणों की सजावट व पूजा पाठ को लेकर खरीददारी करते देखे गए। हरबंशपुर में स्थापित बाबा विश्वकर्मा मंदिर में सोमवार को होने वाले विश्वकर्मा पूजा के लिए सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। इस आयोजन में काष्ठ शिल्पकार बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। विश्वकर्मा पूजा धूमधाम से मनाए जाने के लिए मंदिर की सफाई, रंग-रोगन, सजावट एवं प्रकाश की व्यवस्था की गई है। विश्वकर्मा समाज के अध्यक्ष रविभूषण विश्वकर्मा ने बताया कि बाबा विश्वकर्मा के मंदिर की स्थापना के बाद प्रत्येक वर्ष यह पूजा से विधि विधान से की जाती है। इसमें सभी वर्ग के लोगों का समान रूप से सहयोग प्राप्त होता है।

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¨सह द्वार का लोकार्पण करेंगे मंडलायुक्त :

हरबंशपुर स्थित विश्वकर्मा मंदिर के मुख्य द्वार का लोकार्पण होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडलायुक्त जगत राज व विशिष्ट अतिथि डीआइजी विजयभूषण रहेंगे। मुख्य द्वार का लोकार्पण मंडलायुक्त जगत राज करेंगे।

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विश्वकर्मा पूजा का आध्यात्मिक महत्व : जिसकी संपूर्ण सृष्टि और कर्म व्यापार वह विश्वकर्मा है। सहज भाषा में यह कहा जा सकता है कि संपूर्ण सृष्टि में जो भी कर्म सृजनात्मक है, जिन कर्मों से जीव का जीवन संचालित होता है। उन सभी के मूल में विश्वकर्मा है। अत: उनका पूजन जहां प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक ऊर्जा देता है वहीं कार्य में आने वाली सभी अड़चनों को खत्म करता है।

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विधि-विधान से करें पूजा : सर्वप्रथम श्रीविश्वकर्मा जी की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी, रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि की व्यवस्था कर लें। इसके बाद फैक्ट्री, वर्कशॉप, ऑफिस, दुकान आदि के स्वामी को स्नान करके सपत्नीक पूजा के आसन पर बैठना चाहिए। फिर विधि-विधान से क्रमानुसार स्वयं या फिर अपने पंडितजी के माध्यम से पूजा करें।

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Posted By: Jagran