जागरण संवाददाता, आजमगढ़: सहभागिता योजना के अंतर्गत गोवंश भरण पोषण से संबंधित देयकों एवं गोवंश सुपुर्दगी से संबंधित सूचना जानबू्झकर विलंब से प्रस्तुत किए जाने और समस से गोपालकों को भरण पोषण की धनराशि उपलब्ध कराए जाने की कार्रवाई बाधित किए जाने के प्रति प्रथम दृष्टया पशु चिकित्साधिकारी (वीओ)तरवां दोषी पाए गए हैं। सीवीओ की आख्या पर सीडीओ ने पशु चिकित्सा अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव पशुपालन विभाग को पत्र प्रेषित किया है।

नोडल अधिकारी ने 14 जनवरी को सरायमीर गोशाला का निरीक्षण किया था। उस समय उन्होंने गोवंश सुपुर्दगी के बाद लाभार्थियों को भरण-पोषण के भुगतान की रिपोर्ट मांगी थी। सीवीओ की आख्या के अनुसार पशु चिकित्साधिकारी ने पशुपालक बैजनाथ राम के गोवंश भरण पोषण के लिए देयक बिल प्रति माह ‌र्प्रस्तुत न करके, अप्रैल से दिसंबर तक के बिलों को समायोजित करके 13 जनवरी को उपलब्ध कराया गया। साथ ही मोती यादव निवासी उघरा कूबा(सिहुका अबीरपुर) को एक गोवंश आठ फरवरी को सुपुर्दगी में दिया गया जिसकी सूचना लगभग 10 माह बाद 13 जनवरी को दी गई।

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