जागरण संवाददाता, आजमगढ़ : गार्ड नहीं, ट्रेन का मैनेजर कहिए जनाब ..। जी, हां रेलवे बोर्ड ने नए साल में अपने कर्मचारियों को सम्मान की सौगात दी है। गार्ड को उनके वेतनमान के मुताबिक मैनेजर और सहायक मैनेजर कहा जाएगा। रेलवे बोर्ड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर एमके गुप्ता के आदेश जारी करते हुए गार्डों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।

भारतीय ट्रेनों के संचालन में अभी तक दो ही नाम जाने जाते थे। इनमें चालक व सहायक चालक (रेलवे की भाषा में लोको पायलट व असिस्टेंट लोको पायलट) व गार्ड होते है। गार्ड का जैसा नाम, ठीक उसी तरह का रेलवे काम कराती थी। मसलन, गार्ड ही लोको पायलट यानी चालक को ट्रेन चलाने, रोकने के लिए हरी झंडी दिखाते थे। इसी बीच रेल प्रशासन ने वेतनमान के मुताबिक गार्डों के पदनाम में परिवर्तन कर दिया है। मसलन, 1900 ग्रेड-पे वाले गार्ड असिस्टेंट पैसेंजर ट्रेन मैनेजर, 2800 ग्रेड पे वाले गुड्स ट्रेन मैनेजर, 4200 ग्रेड पे वाले सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर, सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर व मेल-एक्सप्रेस ट्रेन मैनेजर रखा गया है। सीनियर मैनेजरों में भी पे-बैंड व लेवल 2 व 6 के आधार पर नामकरण में परिवर्तन किया गया है। रेलवे का नया नामकरण भी गार्डों के कार्य के ²ष्टिगत फिट बैठने के साथ ही उनके सम्मान को बढ़ाने वाला है। इससे उनमें ऊर्जा बढ़ेगी, जिसका सीधा लाभ रेलवे को मिलेगा।

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वर्जन ..

'रेलवे बोर्ड का लेटर मिल चुका है। गार्डों के नाम में परिवर्तन किया गया है। वेतन ग्रेड, लेवल के आधार पर नाम सीनियर, असिस्टेंट इत्यादि जोड़ा गया है।'

पंकज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे।

Edited By: Jagran