जागरण संवाददाता, सगड़ी (आजमगढ़): सन्यास लेने के पांच दशक बाद सगड़ी तहसील पहुंचे उदासीन अखाड़ा महाराष्ट्र के महंत ने अपनी पैतृक जमीन बहन के नाम दान कर दी। वह क्षेत्र में आने के बाद भी अपने पैतृक गांव के साथ अपनी बहन के गांव भी नहीं गए। केवल इतना कहा कि मेरे दिमाग में आया कि जमीन को बहन के नाम दान दे दिया जाए। उसके बाद वह वाराणसी के लिए रवाना हो गए जहां से महाराष्ट्र स्थित आश्रम जाएंगे।

क्षेत्र के देवारा खास राजा में जन्मे रामसकल पटेल (अब रामसेवक दास) महाराष्ट्र के सत्य पंचमेश्वर पंचायती उदासीन अखाड़ा के महंत हैं। उन्होंने तहसील पहुंचकर अपनी बहन माधव का पुरा निवासी झिनकी देवी को अपनी पैतृक जमीन दान दी। विदित हो कि 12 वर्ष की अवस्था में रामसकल पुत्र सहदेव का सांसारिक जीवन से मोह भंग हो गया तो सन्यासी जीवन जीने के लिए घर छोड़कर निकल गए। उन्होंने महाराष्ट्र के गोमुख आश्रम आमला गांव में पहुंचकर सन्यासी बन गए जहां वर्तमान समय में अपने गुरु की गद्दी संभालते हुए अखाड़ा बड़ा उदासीन के महंत हैं।

इधर कुछ समय पहले उनके भांजे रामअचल पटेल मुंबई घूमने के लिए गए जहां महंत के दर्शन के उपरांत जानकारी मिली तो अपने घर आकर माता झिनकी देवी को बताया। उसके बाद स्वजनों का आना-जाना शुरू हुआ तो महंत के मन में अपनी पैतृक जमीन बहन को देने की इच्छा जागृत हुई। 50 वर्ष बाद महंत को अपने बीच में पाकर स्वजन प्रफुल्लित रहे, वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोग उनसे आशीर्वाद लेने में लगे रहे। इस दौरान बेचन पटेल, मल्लन पटेल, लल्लन पटेल, गुलाब, ऋषिमुनि, रामअवध आदि मौजूद रहे।

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