जास, आजमगढ़ : नहरें सूखी हैं और नलकूप खराब हैं। सिचाई के दोनों प्रमुख साधन जवाब दे चुके हैं, जबकि धान की फसल के लिए पानी की सख्त जरूरत है। किसान परेशान हैं। वहीं शासन के निर्देश पर जिले में लगाए गए 23 नए राजकीय नलकूप निर्माण काल से ही बंद पड़े हैं। उधर, विभागीय अधिकारी विद्युत व्यवस्था न होना बता कर मामले से पल्ला झाड़ ले रहे हैं।

जिले में नहरों का जाल फैला हुआ है जिससे किसान अपनी खेत की सिचाई करते हैं। सिचाई में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए जिले में 542 राजकीय नलकूप भी लगाए गए हैं। बावजूद इसके किसानों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है।

जहानागंज प्रतिनिधि के अनुसार-कनैला किशनपुर, लप्सीपुर, अभिलाषण, भुजही व करउत होते हुए धनहुआ की ओर जाने वाली शारदा सहायक खंड 32 में जरूरत के समय एक बूंद भी पानी नहीं है। गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी, माधव राघव चतुर्वेदी, अरविद सिंह, हरेंद्र यादव व रुद्र प्रताप सिंह सहित अन्य किसानों ने कहा कि जब हमें पानी की जरूरत नहीं होती है तो पानी छोड़ते हैं जिससे फसल बर्बाद होती है। आज जरूरत है तो नहर में पानी नहीं है।

फरिहां प्रतिनिधि के अनुसार-शारदा सहायक खंड 32 की फरिहां माइनर जो परशहां, मक्खन पट्टी, चकिया, नंदपुर, बड़ागांव व मैनपारपुर सहित दर्जनों गांव से गुजर रही माइनर में पानी न आने से फसल सूखने की कगार पर हैं। रामाधार यादव, सुरेंद्र यादव, ओम प्रकाश मिश्रा, सूर्यभान मिश्रा व बलराम यादव ने आक्रोश व्यक्त किया है। वहीं बोंगरिया प्रतिनिधि के अनुसार -रघुनाथपुर व कंचनपुर होते हुए जाने वाली शारदा सहायक खंड 23 की नहर में पानी न आने से किसानों की खेती प्रभावित हो रही है। कुछ किसान तो निजी ट्यूबवेल का सहारा लेकर सिचाई कर रहे लेकिन बहुतायत किसानों की फसल सूख रही है। बैजनाथ, राजेंद्र प्रसाद, राजकुमार, संतोष चौहान, अब्बास अली, हैदर व वीरेंद्र कुमार ने पानी छोड़ने की मांग की है।

Posted By: Jagran

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