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आजमगढ़ में आठ लाख की लागत से बनेगा पक्षी रैन बसेरा, कैलेश्वर धाम में भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ निर्माण

Published: Mon, 14 Sep 2026 06:21 PM (IST)

आजमगढ़ के कैलेश्वर धाम मंदिर परिसर में पक्षियों के संरक्षण हेतु 8 लाख रुपये की लागत से एक विशाल पक्षी रैन बसेरा का निर्माण शुरू हुआ है।

कालेश्वर धाम केली पर पक्षियों का रैन बसेरा का सिलनश करते महंत दिलीप दास।

कालेश्वर धाम केली पर पक्षियों का रैन बसेरा का सिलनश करते महंत दिलीप दास।

HighLights

  1. कैलेश्वर धाम में 8 लाख का पक्षी रैन बसेरा शुरू।

  2. गुजरात के व्यवसायी अखिलेश सिंह की पहल पर निर्माण।

  3. 60 फीट ऊंचा टावरनुमा घर, 10-15 दिन में पूरा।

जागरण संवाददाता अतरौलिया (आजमगढ़)। पक्षियों के संरक्षण और उन्हें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की दिशा में कैलेश्वर धाम मंदिर परिसर में अनूठी पहल शुरू हुई है। सोमवार को करीब आठ लाख रुपये की लागत से बनने वाले पक्षी रैन बसेरा (पक्षी घर) के निर्माण के लिए विधि-विधान से भूमि पूजन किया गया। यह पहल गुजरात के व्यवसायी एवं समाजसेवी अखिलेश सिंह के सौजन्य से शुरू की गई है।

मंदिर के महंत राम दिलीप दास ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन कराया। इसके बाद गुजरात से आई टीम ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया। करीब 60 फीट ऊंचे टावरनुमा पक्षी घर में हजारों छोटे घोंसले बनाए जाएंगे। इनमें पक्षी सुरक्षित रह सकेंगे तथा अंडे देने और बच्चों के पालन-पोषण के लिए उन्हें उचित स्थान मिलेगा। श्रद्धालु नीचे पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था भी कर सकेंगे।

बताया गया कि क्षेत्र के पांच प्रमुख देवस्थलों पर पक्षी घर बनाने की योजना है। कैलेश्वर धाम के बाद भैरव धाम, पौहारी जी स्थान और दुर्वासा धाम समेत अन्य स्थानों पर भी इसका निर्माण प्रस्तावित है। कैलेश्वर धाम में निर्माण कार्य 10 से 15 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।

महंत राम दिलीप दास ने कहा कि कैलेश्वर धाम में दूर-दूर से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी आते हैं। पक्षी घर बनने से उन्हें सुरक्षित आश्रय मिलेगा। प्रदीप पांडेय ने कहा कि पेड़ों की कटाई से पक्षियों के सामने आश्रय का संकट बढ़ा है। इसी को देखते हुए पांच देवस्थलों पर पक्षी घर बनाए जा रहे हैं।

जितेंद्र सोनी ने बताया कि पहले कैलेश्वर धाम के विशाल ताल में साइबेरियन पक्षी भी आते थे। पक्षी रैन बसेरा बनने से धाम की प्राकृतिक सुंदरता और बढ़ेगी। धर्मेंद्र निषाद ने इसे बेजुबान जीवों के लिए पुनीत कार्य बताया। नीरज तिवारी ने कहा कि परियोजना जल्द पूरी कर ली जाएगी।

इस अवसर पर मास्टर राजेंद्र सिंह, अखंड प्रताप सिंह, दिलीप सिंह, अजय मौर्या, नारद सोनकर, दुर्ग विजय सिंह, राजू समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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