जागरण संवाददाता, आजमगढ़: सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिकारी कितने जिम्मेदार हैं, इसका उदाहरण नगर पालिका परिषद मुबारकपुर के गजहड़ा और नगर पंचायत मेंहनगर के देवरिया में बना कांशीराम आवास है। कार्यदायी संस्था से नगर निकायों से बिना हैंडओवर और बिजली, पानी व जलनिकासी की व्यवस्था के ही 218 आवास आवंटित कर दिया गया। जरूरतमंद आवेदन पत्र लेकर आवास आवंटन के लिए डूडा कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं तो उन्हें नियम बताकर वापस कर दिया जा रहा है।

योजना के तहत कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद ने 18.90 करोड़ रुपये की परियोजना में 19 करोड़ रुपये से दोनों स्थानों पर 700 आवासों का निर्माण कराया लेकिन बाह्य कार्य में पानी, बिजली व जलनिकासी की व्यवस्था नहीं कर सका। कई बार की लिखापढ़ी के बाद भी समस्या का समाधान नहीं निकल सका। अब सवाल उठता है कि जब 218 आवास आवंटित कर दिए गए तो शेष 482 आवासों के आवंटन में क्या अड़चन है। बाह्य कार्य के लिए अवस्थापना निधि में पैसा नहीं है। पीओ डूडा को पत्र लिखा गया है कि नगर निकायों से हैंडओवर कराने के साथ ही शेष आवासों का भी आवंटन कर दें, जिससे पात्रों को आवास मिल जाए और भवन की देखरेख भी होती रहे।

-अंजनी कुमार श्रीवास्तव, एक्सईएन, आवास विकास परिषद। गजहड़ा व देवरिया में बने आवासों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। जो आवास आवंटित हुए हैं, वे मेरे कार्यकाल के नहीं है। शेष के संबंध में डीएम को पूरी समस्या से अवगत कराने के बाद ही अनुमति ली जाएगी।

-अरविद कुमार पांडेय, पीओ डूडा।

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