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फरीदाबाद जेल में मारा गया आतंकी अब्दुल रहमान, तब्लीगी जमात में भी रहा सक्रिय

Published: Tue, 10 Feb 2026 09:06 AM (IST)

फरीदाबाद जेल में निरुद्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या हो गई है, जिससे उसके परिवार में मातम छा गया। अयोध्या ...और पढ़ें

घटना की सूचना मिलने के बाद रोते बिलखते परिजन। जागरण

घटना की सूचना मिलने के बाद रोते बिलखते परिजन। जागरण

HighLights

  1. आतंकी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद जेल में हत्या हुई।

  2. कैदी अरुण चौधरी ने मामूली विवाद में उसे मारा।

  3. रहमान विस्फोटक अधिनियम के तहत आरोपी, तब्लीगी जमात में सक्रिय।

महेंद्र तिवारी, मिल्कीपुर (अयोध्या)। हरियाणा की फरीदाबाद जेल में निरुद्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या की सूचना मिलते ही परिवार में मातम पसर गया है। जानकारी मिलते ही पिता अबू बकर व चाचा उस्मान दोपहर में ही मंजनाई गांव से फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए हैं।

मूलरूप से जिले के इनायतनगर थाना क्षेत्र के मंजनाई गांव निवासी अब्दुल रहमान को दो मार्च 2025 को गुजरात एटीएस और हरियाणा एसटीएफ की संयुक्त टीम ने फरीदाबाद से ही गिरफ्तार किया था। तब से वह फरीदाबाद जेल में ही निरुद्ध था। बीती रात मामूली विवाद में जम्मू से हत्या के एक मामले में स्थानांतरित होकर आए कैदी अरुण चौधरी ने उसकी हत्या कर दी है।

आतंकी अब्दुल रहमान के विरुद्ध फरीदाबाद जिले के थाना डबुआ में विस्फोटक अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम व शस्त्र अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज था। गिरफ्तारी के समय एजेंसियों ने उसके पास से ग्रेनेड समेत विस्फोटक सामग्री बरामद होने का दावा किया था।

अब्दुल रहमान गत वर्ष एक मार्च को दोस्त के बुलाने पर मंजनाई गांव से दिल्ली और वहां से फरीदाबाद गया था। नवंबर में ही वह वापस आ गया था। इसके पहले भी वह एक बार और दिल्ली गया था। वहां निजामुद्दीन की बंगले वाली मस्जिद में तब्लीगी जमात में शामिल हुआ। चाल, चरित्र और बातचीत से शालीन अब्दुल रहमान ने मंजनाई के ही मनीराम इंटर कालेज से 2022 में हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। उसके बाद उसने पढ़ाई नहीं की।

नौकरी की तलाश में दिल्ली जाने के बाद वापस आया तो मरकज और जमात में शामिल होने लगा। आसपास के गांवों के लड़कों के साथ वह धीरे-धीरे मरकज व जमात में सक्रिय होने लगा था। पांच वक्त का नमाजी अब्दुल रहमान धार्मिक रूप से कट्टर था। पैसों के लिए बैटरी रिक्शा चलाता था। एक मार्च 2025 को दिल्ली से फोन आने पर वह घर से निकला था।

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पहले जनसेवा केंद्र पर टिकट बुक करके जाने वाला था, लेकिन टिकट नहीं मिलने पर जनरल टिकट पर गांव के दोस्त खुर्शीद के साथ वहां गया। उसके पिता अबू बकर की माली-हालत बहुत अच्छी नहीं है। उनके पास अंत्योदय राशनकार्ड है।

वह मंजनाई बाजार में छोटे से पक्के मकान में चिकन व मीट की दुकान चलाते हैं। मां आशमीन ने बताया कि उनका इकलौता बेटा परिवार में सबसे बड़ा था। तीन बहनें 15 वर्षीय आसमा, 12 वर्षीय अल्फिया व छह वर्षीय अल्फिशा उससे छोटी हैं।