चढ़ावा चोरी की जानकारी अखिलेश को देने वाला SBI कर्मी बना पुलिस का गवाह, सामने आई पूरी इनसाइड स्टोरी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सूचना लीक करने वाले एसबीआई कर्मचारी को पुलिस ने गवाह बनाया है। इस कर्मचारी ...और पढ़ें
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला।
HighLights
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की सूचना एसबीआई कर्मी ने लीक की।
यह जानकारी सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक पहुंचाई गई थी।
पुलिस ने अब उसी एसबीआई कर्मी को गवाह बनाया है।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की सूचना लीक करने वाले और इसे सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक पहुंचाने वाले को पुलिस ने गवाह बना लिया है।
भारतीय स्टेट बैंक का यह सजातीय कर्मचारी कुल 133 गवाहों की सूची के मध्य में शामिल है। इस कर्मी पर चोरी का डिटेल सपा प्रमुख तक पहुंचाने और फेसबुक अकाउंट के माध्यम से सार्वजनिक करने का आरोप है।
आंतरिक जांच में इसे ट्रस्ट ने तो खोज निकाला ही था, जांच के दौरान पुलिस ने भी डिलीट पोस्ट को रिकवर कर साक्ष्य एकत्रित किए थे। अब गवाह बनाए जाने के बाद यह बैंककर्मी पुलिस की ओर से अदालत में पहुंचकर घटना की गवाही देगा।
4 जून को चढ़ावा चोरी मामला आया था सामने
चार जून को सामने आई चढ़ावा चोरी की सूचना सात जून को तब सार्वजनिक हुई थी, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शाम चार बजे एक्स अकाउंट पर ट्वीट कर यह बताया कि राम मंदिर की दानराशि में करोड़ों की अनियमितता हुई है।
हालांकि उसी दिन ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय ने स्पष्टीकरण जारी करके इसका खंडन कर दिया था, लेकिन ट्रस्ट ने आंतरिक जांच शुरू करा कर संदिग्ध कर्मियों से पूछताछ कर चोरी गई धनराशि की रिकवरी शुरू करा दी थी।

13 जून को एसआईटी का हुआ गठन
इस प्रकरण के सुर्खियों में छा जाने के बाद ट्रस्ट के आग्रह पर राज्य सरकार ने 13 जून को एसआईटी गठित कर जांच शुरू कराई। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर 25 जून को आठ आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई तो पुलिस ने जांच शुरू की थी।
इस दौरान पुलिस ने जब ट्रस्ट के साथ गणना कराने वाले एसबीआई के पूर्व व वर्तमान कर्मियों से पूछताछ शुरू की थी, तो दो बैंक कर्मियों ने अपने बयान में इसे पुष्ट कर दिया था कि किसने चोरी की सूचना लीक की और इसे सपा प्रमुख तक पहुंचाया।
दरअसल, ट्रस्ट पदाधिकारी भी इसको लेकर चिंतित रहे कि घटना आखिर लीक कैसे हुई? सूत्रों के अनुसार आंतरिक पड़ताल में ट्रस्ट ने इसे खोज लिया था और उस कर्मी की जानकारी हो गई थी, लेकिन साक्ष्य नहीं मिले थे।
पुलिस ने जांच शुरू की तो साइबर सेल के माध्यम से साक्ष्य जुटा कर उस बैंककर्मी का नाम-पता भी ढूंढ निकाला। एसआईटी के बाद पुलिस को भी भले तीन बैंक कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली, लेकिन किसी को आरोपित बनाने के बजाय गवाह बना लिया गया है। 23 सितंबर को दाखिल आरोप पत्र में शामिल 133 गवाहों में वे तीनों बैंककर्मी भी गवाह हैं, जिनमें से एक पर सूचना सार्वजनिक करने का आरोप है।
