राम मंदिर ट्रस्ट ने दूर की समस्या, अब डोगरा रेजीमेंट से ही बन रहे सैनिकों के पास
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने डोगरा रेजीमेंट सेंटर को रामलला दर्शन पास बनाने की सुविधा दी है।

अयोध्या राम मंदिर।
HighLights
ट्रस्ट ने डोगरा रेजीमेंट को पास बनाने की सुविधा दी।
सैनिकों को रामलला दर्शन में अब नहीं होगी परेशानी।
प्रतिदिन 300 सुगम और 100 विशिष्ट पास का कोटा।
जागरण संवाददात, अयोध्या। रामलला के दर्शन के लिए भटकने और परेशान होने वाले सैनिकों को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक प्रयास से सुविधा मिल गई है।
अगस्त माह में डोगरा रेजीमेंट सेंटर (डीआरसी) स्थित सैनिक सदन को लागिन उपलब्ध करा दिए जाने से अब प्रतिदिन सैनिक वहीं से पास बनवा कर दर्शन कर रहे हैं। यह पहल ट्रस्ट मेंं कार्यरत पूर्व सैनिकों के ध्यानाकर्षण पर अंतरिम महासचिव रहे ट्रस्टी कृष्णमोहन ने की थी। इससे सैनिकों के साथ यात्री सेवा केंद्र के कर्मियों की भी परेशानी समाप्त हो गई।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से रामलला के विशिष्ट व सुगम दर्शन के लिए पास बनाने की सुविधा पुलिस-प्रशासन के उच्चाधिकारियों को काफी पहले उपलब्ध करा दी गई थी, परंतु तीनों सेनाओं से जुड़े अधिकारियों व सैन्यकर्मियों के पास यात्री सेवा केंद्रों पर पहुंचने पर किसी ट्रस्टी की अनुशंसा पर बनते थे।
इसके लिए रेजीमेंट से भी लाइजनिंग आफिसर नियुक्त रहे। गत दिनों चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद जब पूर्व महासचिव चंपतराय का त्यागपत्र हुआ, तो सैन्यकर्मियों के पास नहीं बन पा रहे थे।
चंपतराय ही अधिकृत होने के कारण परेशानी हो रही थी। इस समस्या को ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने डोगरा रेजीमेंट सेंटर को भी लागिन उपलब्ध कराकर खत्म कर दिया। प्रतिदिन 300 सुगम और 100 विशिष्ट पास का कोटा तय होने से बाहर से आने वाले सैनिक भी डीआरसी में संपर्क करके पास बनवाते हैं और मंदिर पहुंच निर्धारित मार्ग से दर्शन करते हैं।
डोगरा रेजीमेंट में कार्यरत हैं दो-तीन हजार सैन्यकर्मी
वर्ष 1976 में स्थापित डोगरा रेजीमेंट सेंटर (डीआरसी) भारतीय थल सेना का महत्वपूर्ण रेजीमेंट है। यहां विभिन्न रैंक व शाखाओं के लगभग दो से तीन हजार सैन्यकर्मी कार्यरत हैं। मेरठ में 1952 में स्थापित हुए डीआरसी को 1976 में अयोध्या शिफ्ट किया गया था।
सैनिक सदन को उपलब्ध कराई गई ट्रस्ट की लागिन से तीनों सेनाओं से जुड़े कर्मियों को दर्शन पास बनवाने की सुविधा दी गई है। अज्ञानतावश यदि कोई सैन्यकर्मी पहले मंदिर पहुंच जाते हैं, तब भी यात्री सेवा केंद्र के कर्मी रेजीमेंट से समन्वय स्थापित कर पास बनवा देते हैं।
