यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 13, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Ram Mandir Update: स्थापना के बाद 48 दिनों तक होगी "राग सेवा", ऐतिहासिक बनेगा दिन
Ram Mandir Update रामजन्मभूमि पर 495 वर्ष बाद नवनर्मित मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा ऐतिहासिक ही नहीं अपूर्व-अविस्मरणीय भव्यता ...और पढ़ें

रमाशरण अवस्थी, अयोध्या। रामजन्मभूमि पर 495 वर्ष बाद नवनर्मित मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा ऐतिहासिक ही नहीं अपूर्व-अविस्मरणीय भव्यता और गरिमा की भी परिचायक है। इसी क्रम में रामलला की राग सेवा भी संयोजित है। रामलला के विग्रह की स्थापना 22 जनवरी को होगी और इसी के चार दिन बाद यानी 26 जनवरी से रामलला की राग सेवा शुरू होगी। इसके बाद से 48 दिनों तक रामलला का दरबार राग सेवा से सज्जित होगा।
राग सेवा के लिए देश के दिग्गज संगीतज्ञों को आमंत्रित करने की योजना है। दिन के सभी पहरों में राग सेवा अपने विशिष्ट समयानुसार संयोजित होगी, जो राग जिस समय प्रस्तुत किया जाता है, उसकी प्रस्तुति उसी समय पर सुनिश्चित होगी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राग सेवा अर्पित करने के लिए कलाकारों से समन्वय का दायित्व कवि, कलाविद् एवं संगीत समीक्षक तथा अयोध्या राज परिवार के सदस्य यतींद्र मिश्र को सौंपा है।
जन्मभूमि पर निर्माणाधीन राम मंदिर के पांच उप मंडपों में से एक नृत्य मंडप में दिग्गज कलाकार राग सेवा अर्पित करेंगे। दिलचस्प यह कि राग सेवा पूरी शास्त्रीयता के अनुरूप समर्पित होगी। राग सेवा समर्पित करने की शृंखला में सितार, तबला, पखावज, शहनाई जैसे वाद्य की स्वतंत्र प्रस्तुति के साथ देश की शास्त्रीय नृत्य परंपरा के साथ कई प्रांतों के प्रतिनिधि नृत्य और भजन-सबद और कीर्तन जैसी विधा में गायकी की प्रस्तुतियां होंगी। उपासना के विशेषज्ञों का मानना है कि भक्ति के कुछ विशेष साधनों में संगीत सर्वोपरि है।
48 दिन का निर्धारण मंडल पूजा के अनुरूप
राग सेवा के लिए 48 दिन का निर्धारण रामलला की मंडल पूजा के अनुरूप है। शास्त्रों में मंडल पूजा के लिए 48 दिन का विधान है, क्योंकि 29 नक्षत्र, 12 राशि और नवग्रह का एक मंडल होता है। इसी विशिष्ट पूजा के क्रम में रामलला की राग सेवा संयोजित की जा रही है।
