राम मंदिर चढ़ावा चोरी: गणना कर्मियों ने ही किया सिंडिकेट का पर्दाफाश, अनिल-गोपाल व नरेंद्र ने दिखाई पहली वीडियो
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया है, जिसमें खुलासा हुआ है कि गणना ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
पुलिस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी में आरोप पत्र दाखिल किया।
गणना कर्मियों ने ही चोरी के सिंडिकेट का पर्दाफाश किया।
चंपतराय को कर्मियों ने सबसे पहले चोरी की जानकारी दी।
प्रवीण तिवारी, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा चोरी में पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। इसमें चोरी की घटना सिलसिलेवार तरीके से दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि चढ़ावा चोरी के सिंडीकेट का राजफाश भी गणना कर्मियों ने ही किया था। साथ ही तत्कालीन महासचिव चंपतराय को इसका पहला वीडियो भी इन्हीं कर्मियों ने भेजा। साथ ही मैसेज भेज बताया कि चोरी की गणना में 67 लड़के शामिल हैं।
महासचिव चंपतराय को घटना की पहली जानकारी आनंद कुमार चौधरी ने दी। जब चंपतराय चार जून को दिल्ली से अयोध्या आ रहे थे, इस दौरान दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से वीडियो और लिखित मैसेज मिला। इसमें वीडियो में बाथरूम के अंदर नोटों की गड्डियां दिखाई गई थीं। ये सवा दो लाख रुपये थे, जो बरामद भी हुए। कुछ लड़के कई दिनों से चोरी कर रहे थे। इनकी संख्या 67 बताई गई है।
दूसरे दिन पांच मई को चंपतराय के कारसेवकपुरम स्थित आवास पर दोपहर में ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र, गोपाल राव व नरेंद्र आए, जिसमें नरेंद्र के लैपटाप से कुछ वीडियो दिखाया गया। इसमें गणना कक्ष में दान, चढ़ावा के रुपये की गिनती करते समय गणना कर्मी रुपयों की चोरी करते हुए दिखाई दे रहे थे।
चार जून को आनंद कुमार चौधरी ने भेजा था चंपतराय को चोरी का क्लिप व मैसेज
गवाह आनंद चौधरी चार जून को ड्यूटी समाप्ति के बाद जब घर जाने का समय हुआ तब मुझे उस दिन बैंक व ट्रस्ट की ओर से गणना कक्ष में मौजूद कर्मियों ने रोक लिया, इसमें बैंक की ओर से सत्या, ट्रस्ट के विनय श्रीवास्तव, गणना कर्मी मदन गोपाल निगम, आकाश गौड़, रितिक सिंह व एक और कर्मी था। इसमें एक कर्मी ने पुलिस को बताया कि तीन जून को मेरी ड़यूटी कैश काउंटिंग में दूसरी पाली में लगी थी, उस दिन मेरे साथ लगे करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, अविनाश शुक्ल, अनुकल्प मिश्र ये लोग दान में मिले रुपये को चाेरी से उठाकर मेज के नीचे अपने कमर में छिपा रहे थे।
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बाथरूम में जाकर बातचीत
चार जून को अविनाश को चोरी करते हुए संत प्रसाद वर्मा ने देख लिया। इसके बाद हम लोग बाथरूम के पीछे जाकर आपस में बातचीत करने लगे। इसकी सूचना विनय श्रीवास्तव व बैंक कर्मी सत्य प्रकाश को दी गई। इन लोगों ने इस पर गणना कक्ष पर चेकिंग लगा दी। यह देख कर ही आरोपियों ने चोरी की राशि को बाथरूम में छिपाया, जो तलाशी के बाद बरामद हुए। इस धनराशि को विनय श्रीवास्तव ने बाक्स में सुरक्षित रखवा दिया था।
