राम मंदिर के सीईओ एक्शन मोड में, सत्यापन के बाद करेंगे कर्मियों का स्थानांतरण
राम मंदिर के सीईओ एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र प्रबंधन संभालने के बाद एक्शन मोड में हैं।

राम मंदिर के सीईओ जितेंद्र मिश्र। (तस्वीर- फाइल)
HighLights
सीईओ जितेंद्र मिश्र ने राम मंदिर प्रबंधन संभाला, एक्शन मोड में।
कर्मियों की पृष्ठभूमि जांच कर आंतरिक स्थानांतरण की योजना।
मानव संसाधन रिकॉर्ड दुरुस्त करने, कार्यप्रणाली व्यवस्थित करने का लक्ष्य।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रथम मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में राम मंदिर के प्रबंधन का प्रभार संभालने के बाद से ही एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्र एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं।
रामजन्मभूमि परिसर और राम मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं व सेवाओं के बारे में भली-भांति अवगत हो जाने और सभी शाखा प्रभारियों से परिचित होने के बाद अब सीईओ शीघ्र ही परिसर में कार्यरत कर्मियों की सेवाओं व स्थान में परिवर्तन करने जा रहे हैं।
उन्होंने सभी ट्रस्ट कार्मिकों और एजेंसी की ओर से तैनात कर्मियों की पृष्ठभूमि की जांच शुरू करा दी है। सभी कर्मियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि, पूर्व व वर्तमान सेवा, कार्यानुभव, शैक्षिक योग्यता, किसी विशेष कार्य में निपुणता आदि का आकलन हो जाने के उपरांत वर्तमान सेवा की अवधि के आधार पर आंतरिक स्थानांतरण की योजना बनाई जा रही है।
यदि कोई कर्मी एक ही स्थान पर किसी विशेष सेवा या व्यवस्था में लंबे समय से कार्यरत है, तो उसे अन्य व्यवस्थाओं में तैनात किया जा सकता है।
सीईओ के इस प्रयास का उद्देश्य सभी कर्मियों के बारे में समग्र जानकारी जुटाकर मानव संसाधन रिकॉर्ड को दुरुस्त करना है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर किसी भी कर्मी के बारे में तुरंत जानकारी की जा सके और एक ही स्थान पर काफी समय से काम कर रहे लोगों के दायित्व में परिवर्तन किया जा सके। इसी के साथ सीईओ मंदिर प्रबंधन की विभिन्न व्यवस्थाओं व सेवाओं में कार्यरत कर्मियों के लिए अलग-अलग एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) भी तैयार करवा रहे हैं।
इसके आधार पर परिसर में ट्रस्ट व आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे लगभग एक हजार कर्मियों की कार्यप्रणाली को व्यवस्थित व समयबद्ध किया जाएगा। इससे सभी कर्मचारी पारदर्शी ढंग से अपने-अपने कार्यों का निष्पादन कर सकेंगे।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय बताते हैं कि अब मंदिर प्रबंधन से जुड़ी समस्त प्रशासकीय व्यवस्थाएं सीईओ के जिम्मे है। वह मंदिर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं के निमित्त सेवाओं व सुविधाओं में परिवर्तन के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
यदि उन्हें आवश्यक लगा तो वह कर्मचारियों के दायित्व में परिवर्तन भी कर सकते हैं। इसमें किसी ट्रस्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। अब कर्मियों का स्थानांतरण उन्हीं के स्तर से किया जाएगा। वह योग्यता व अनुभव के आधार पर दायित्व में बदलाव कर सकेंगे।
