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राम मंदिर CEO के फाइनल इंटरव्यू तक पहुंचे थे 16 आवेदक, IAS-IPS सहित सेना से जुड़े 8 अधिकारी शामिल

Published: Fri, 18 Sep 2026 07:50 AM (IST)

अयोध्या के श्रीराम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर बीते दिनों एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का ...और पढ़ें

अयोध्या राम मंदिर।

अयोध्या राम मंदिर।

HighLights

  1. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने राम मंदिर के पहले सीईओ।

  2. 5500 से अधिक आवेदकों में से 16 अंतिम साक्षात्कार तक पहुंचे।

  3. अंतिम 16 में 8 सैन्य पृष्ठभूमि के अधिकारी शामिल थे।

लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। सर्वाधिक दर्शनार्थी संख्या वाले देश के सबसे बड़े राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद को पाने के लिए वैसे तो साढ़े पांच हजार से अधिक आवेदक आगे आए थे, लेकिन अंत में जीत 'ऑपरेशन सिंदूर' में देश का पराक्रम दिखाने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की हुई थी।

अंतिम साक्षात्कार तक पहुंचने वाले 16 आवेदकों में उनकी तरह सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े आठ आवेदक शामिल हुए थे। उन आवेदकों का भी सेना में रहते हुए देश के प्रति योगदान अविस्मरणीय रहा है।

इनके अलावा अन्य आठ आवेदकों में चार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस), तीन भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) और एक यांत्रिक अभियंता रहे, जिनका भारतीय रेल के विकास में अप्रतिम योगदान रहा है।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय चयन समिति के तत्वावधान में 11 व 12 अगस्त को संयोजित हुए सीईओ के अंतिम साक्षात्कार में चयन के तीसरे चरण में योग्य 16 आवेदकों को अयोध्या बुलाया गया था।

इन्हें पांच हजार 585 आवेदनों की दो चरणों में गहन छंटनी के उपरांत सर्वश्रेष्ठ, अनुभवी व कर्मठ माना गया था। रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली समिति में रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी व परमाणु विज्ञानी डॉ. सुरेश हावरे सदस्य रहे थे।

इन सदस्यों ने दो दिनों तक जिन आवेदकों का अंतिम साक्षात्कार लिया, उनमें उत्तर प्रदेश के साथ आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान सहित अन्य राज्यों के सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी व सेना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।

अंतिम साक्षात्कार में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के अलावा आइआदएम गुवाहाटी के विशेष कार्याधिकारी कर्नल डॉ. हरिंद्र त्रिपाठी, केंद्र सरकार के रक्षा उपक्रम भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) के सलाहकार सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सहगल, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह विश्वासराव, सेंट्रल एयर कमांड से जुड़े रहे और तेजस व अग्नि मिसाइल प्रोग्राम के लिए कावेरी इंजन विकसित करने वाले एयर मार्शल अमित तिवारी, नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल रहे मेजर जनरल राजीव छिब्बर, ब्रिगेडियर सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा, मेजर जनरल अजय कुमार शर्मा, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव रहे 1990 बैच के रिटायर्ड आइएएस अजीत केसरी, 1993 बैच के आइएएस व आंध्र प्रदेश के रिटायर्ड स्पेशल चीफ सेक्रेटरी गोपाल कृष्ण द्विवेदी, उत्तर प्रदेश में विशेष सचिव, लोक निर्माण विभाग रहे 1989 बैच के सेवानिवृत्त आइएएस डॉ. दिनेशचंद्र मिश्र, 1994 बैच के बिहार कैडर के रिटायर्ड आइपीएस डॉ. परेश सक्सेना, सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त महानिदेशक कमलकांत शर्मा, राजस्थान कैडर की 2013 बैच की आइएएस श्रुति भारद्वाज, 2003 बैच के रिटायर्ड आइपीएस राजेश कुमार पांडेय और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) के प्रमुख मुख्य यांत्रिक अभियंता व ट्रेन-18 (वंदे भारत एक्सप्रेस) को विकसित करने वाले इंजीनियर शुभ्रांशु मणि शामिल रहे थे।

अंतिम साक्षात्कार के उपरांत समिति ने जिन तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंपा था, उनमें नवनियुक्त सीईओ जितेंद्र मिश्र के साथ मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज का नाम शामिल था।

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इनसेट :

दो आवेदकों को पहले से था मंदिर प्रबंधन का अनुभव :

अंतिम साक्षात्कार तक पहुंचे आवेदकों में केवल दो व्यक्ति ही ऐसे रहे, जिन्हें मंदिर प्रबंधन का अनुभव था। इनमें से आइपीएस राजेश पांडेय अब भी लखनऊ के प्राचीन हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव के रूप में कार्यरत हैं, तो रिटायर्ड आइएएस गोपालकृष्ण द्विवेदी आंध्र प्रदेश के प्रख्यात तिरुपति मंदिर का प्रबंधन देखने वाले तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में अधिकारी रहे हैं। हालांकि, सीईओ जितेंद्र मिश्र पर भी वायु सेना की पश्चिमी कमान का एयर मार्शल रहते हुए विभिन्न एयरबेस के कई मंदिरों के प्रबंधन का दायित्व रहा है।