राम मंदिर: संघ-विहिप पदाधिकारियों की कलह से खुला चढ़ावा चोरी का राज, वो ड्राइवर कौन था?
राम मंदिर के दानपात्रों से चढ़ावा चोरी का मामला आंतरिक कलह के कारण सामने आया है, जिसमें एक ट्रस्ट पदाधिकारी ...और पढ़ें

HighLights
ट्रस्ट पदाधिकारी के ड्राइवर का बढ़ता हस्तक्षेप विवाद की जड़।
नाराज धड़े ने रणनीति बनाकर चढ़ावा चोरी का किया खुलासा।
मामले की गंभीरता देख राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि में गबन का खेल कब से चल रहा था और इसमें कितने लोग संलिप्त हैं, यह तो जांच का विषय है, परंतु अब तक विभिन्न माध्यमों से उजागर हुए प्रकरण से स्पष्ट है कि चोरी का यह मामला निश्चित समयावधि का नहीं है।
चढ़ावा चोरी का यह प्रकरण शायद सामने भी नहीं आ पाता, यदि इसके सूत्रधार संघ व विहिप से जुड़े वे पदाधिकारी न बनते, जो मंदिर प्रबंधन में अपना दखल बढ़ाने को लेकर परेशान थे। इन्हीं लोगों ने रणनीति के तहत पहले सूचनाएं एकत्रित कीं, फिर ट्रस्ट पदाधिकारी को जानकारी देकर रंगे हाथ पकड़वाया। इसे छिपाने का प्रयास हुआ तो जानकारी लीक कर दी गई।
सूत्र बताते हैं कि एक ट्रस्ट पदाधिकारी के पहले ड्राइवर रहे व्यक्ति का बहुत कम समय में इतना हस्तक्षेप बढ़ गया कि वह न केवल राम मंदिर का प्रबंधन देखने लगा, बल्कि रामजन्मभूमि परिसर के अन्य आयोजनों व कार्यों का भी दायित्व संभालने लगा। शायद ही कोई आयोजन या बैठक उसके बिना होती रही हो।
प्रत्येक स्थान पर उसके बढ़ते दखल से उन्हीं पदाधिकारी के समर्थकों का एक धड़ा इससे नाराज चल रहा था। ये लोग लंबे समय से विहिप से जुड़े होने के बाद भी मंदिर की व्यवस्था में प्रभावी नहीं हो पाए, जितना वह ड्राइवर हो गया। इसी वजह से समय-समय पर संघ व विहिप से जुड़े कुछ समर्पित पदाधिकारियों या कार्यकर्ताओं काे रामसेवकपुरम या कारसेवकपुरम वापस भी लौटना पड़ा।
इन्हीं कारणों से कुछ लोगों ने गुपचुप ढंग से रणनीति बनाई और ड्राइवर का करीबी बन धीरे-धीरे सूचनाएं जुटाई जाने लगीं। इसी बीच जब इस धड़े के मुखिया को गणना के दौरान चढ़ावा चोरी की जानकारी मिली तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। यह भी पता चला कि यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही है।
इस प्रकरण से उन ट्रस्ट पदाधिकारी को सूचित करने की आवश्यकता जताई गई, जिनका वह करीबी रहा है। योजना के तहत उन्हें जानकारी दी गई और रंगे हाथ पकड़वाने की सोची गई। पांच जून को दोपहर में अचानक वह ट्रस्टी कारसेवकपुरम से रामजन्मभूमि के यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) पहुंच गए।
सूत्रों ने बताया कि उन्होंने तुरंत सुरक्षाकर्मी को बुला कर निकलते समय एक गणना कर्मी की तलाशी करा दी, तो कुछ धन बरामद हो गया। उसे पीएफसी के कमरे में ले जाकर गहन पूछताछ हुई तो दूसरे लोगों के नाम भी सामने आ गए और बाथरूम से बड़ी नकदी भी मिली।
इस पर वह पदाधिकारी आक्रोशित हो गए और सबके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी देकर निकल गए। उन्हें मनाने व समझाने का प्रयास शुरू हुआ, इसी बीच कोई फोन आ गया और वह दबाव के चलते पीछे हट गए।
हालांकि, यह रणनीति जरूर बनी कि इन कर्मियों से पूछताछ कर पैसे बरामद कर लिए जाएं। बात बाहर न जाए, इसलिए विधिक कार्रवाई न कराई जाए। तबसे इसी रणनीति पर सारी प्रक्रिया चल रही, परंतु उसी धड़े ने सारी जानकारी परिसर के बाहर लोगों को दे दी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक यह मामला पहुंचा, तो उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर दिया। तभी से चढ़ावा चोरी का प्रकरण सुर्खियों में छाया हुआ है।
ऐसे-ऐसे सुर्खियों में आता गया चढ़ावा चोरी का प्रकरण
- 07 जून : सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट किया और पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय पवन ने मीडिया से वार्ता में चढ़ावे से पांच करोड़ से साढ़े सात करोड़ रुपये की चोरी बताई।
- 07 जून : श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्टीकरण जारी कर आंतरिक अंकेक्षण चलने की बात कही।
- 08 जून : भाजपा नेता डा. रजनीश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की।
- 08 जून : प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान ले लिया और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र देरशाम अचानक अयोध्या पहुंच गए।
- 09 जून : नृपेंद्र मिश्र ने रामजन्मभूमि परिसर में गोपनीय बैठक कर ट्रस्टियों से विस्तृत जानकारी ली। दिल्ली रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में इसे ट्रस्ट का आंतरिक मामला बता खारिज किया।
- 10 जून : राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का वीडियो और इंटरव्यू प्रसारित हुआ, जिसमें उन्होंने 2021-2022 में कार्यरत रहते हुए पूर्व में भी लाखों रुपये के नोटों की गड्डियों की चोरी पकड़ने का दावा किया। साथ ही सीसीटीवी फुटेज डिलीट करा देने की बात कहते हुए कई लोगों के नाम लिए। सपा प्रमुख ने वीडियो को शेयर करते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।
- 11 जून : विवाद गहराया तो ट्रस्ट अध्यक्ष महांत नृत्यगोपालदास के उत्तराधिकारी महांत कमलनयनदास ने बयान दे दिया कि ‘जांच करने वाले ही बेईमान हैं तो क्या जांच होगी, भगवान ही दंड देंगे।’ इसको लेकर पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी मीडियाकर्मियों को रहस्यमयी बयान दे दिया।
- 11 जून : ट्रस्टियों की बैठक में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से प्रकरण की जांच कराने का निर्णय लिया गया।
- 13 जून : राज्य सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआइटी गठित कर दी।
