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रूस की राजधानी मॉस्को में भी दीपोत्सव, दिग्गज अभिनेता गेन्नादी पेचनिकोव की याद में होगी रामलीला

Published: Thu, 05 Nov 2026 03:12 PM (IST)

अयोध्या में 7 नवंबर को दीपोत्सव मनाया जाएगा, जिसकी गूंज हजारों किलोमीटर दूर मॉस्को में भी सुनाई देगी।

रूसी-भारतीय मैत्री संघ 'दिशा' द्वारा मॉस्को में दीपोत्सव और रामलीला का मंचन किया जाएगा, जो भारत-रूस की सांस्कृतिक मैत्री का संदेश देगा।

रूसी-भारतीय मैत्री संघ 'दिशा' द्वारा मॉस्को में दीपोत्सव और रामलीला का मंचन किया जाएगा, जो भारत-रूस की सांस्कृतिक मैत्री का संदेश देगा।

जागरण संवाददाता, अयोध्या। अद्भुत से अलौकिक और अविस्मरणीय तक का सफर तय कर दीपोत्सव अब वैश्विक क्षितिज पर अपनी आभा बिखेर रहा है। रामनगरी में 7 नवंबर को दीपोत्सव की भव्यता दिखेगी तो हजारों किलोमीटर दूर रूस की राजधानी मॉस्को में भी दीपों की रोशनी के साथ रामकथा की गूंज सुनाई देगी।

अयोध्या की तर्ज पर मॉस्को में भी दीपोत्सव मनाने की तैयारी है। रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रामलीला का मंचन भारतीय संस्कृति, आस्था और भारत-रूस की सांस्कृतिक मैत्री का संदेश देगा। इस बार अयोध्या के दीपोत्सव में रूसी रामलीला दल को आमंत्रित नहीं किया गया है। ऐसे में कलाकारों ने स्वयं मॉस्को में दीपोत्सव व रामलीला का मंचन करने का निर्णय लिया है।

मॉस्को के रूसी विद्यालय में पद्मश्री गेन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की स्मृति में ‘दिशा रामलीला’ का आयोजन होगा। इसमें 12 कलाकार रामलीला का मंचन करेंगे। रामलीला का रिर्हसल जारी है। रूसी रामलीला के निर्देशक डा. रामेश्वर सिंह ने दूरभाष पर बताया कि रूस में वर्ष 1960 से रामलीला का मंचन हो रहा है। दीपोत्सव में रूसी रामलीला की प्रस्तुति तीन बार हो चुकी है।

रामनगरी से गहरा जुड़ाव होने के चलते इस बार आमंत्रण नहीं मिलने के बावजूद कलाकारों का उत्साह कम नहीं हुआ। उन्होंने मॉस्को में ही दीपोत्सव मनाने का निर्णय लिया है। वर्ष 2018, 2023 व 2025 के दीपोत्सव में रूसी कलाकारों ने अयोध्या में रामलीला प्रस्तुत की थी। जनवरी 2019 में प्रयागराज कुंभ में भी दल ने प्रस्तुति दी।

रूसी कलाकार दीपोत्सव में नाट्य और नृत्य-बैले शैली में रामायण का मंचन कर चुके हैं। वर्ष 2010 में स्थापित रूसी-भारतीय मैत्री संघ ‘दिशा’ रूस में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और कलात्मक विरासत को बढ़ावा देने के साथ दोनों देशों के नागरिकों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में जुटा है। इस बार मास्को में दीपोत्सव का आयोजन इसी सांस्कृतिक यात्रा की अगली कड़ी बनेगा।

‘रूसी राम’ की स्मृति में जीवंत हुई परंपरा

सोवियत और रूसी रंगमंच के प्रतिष्ठित अभिनेता और निर्देशक पद्मश्री गेन्नादी पेचनिकोव को ‘रूसी राम’ के नाम से जाना जाता था। उन्होंने करीब दो दशक तक रूसी रंगमंच के माध्यम से रामायण को वहां के दर्शकों तक पहुंचाया। भारत के प्रति उनके प्रेम और समर्पण के लिए उन्हें भारत सरकार ने बाल मित्र पदक और पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था। वे लगभग दो दशकों तक भारतीय संस्कृति के दूत के रूप में जाने गए।

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पद्मश्री गेन्नादी पेचनिकोव को ‘रूसी राम’ के नाम से जाना जाता था।

निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि ''दिशा रामलीला मॉस्को'' के मंच पर जब रूसी कलाकार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के रूप में संवाद करेंगे, तब वह अभिनय सीमाओं को पार कर दोनों देशों के साझा मूल्यों आस्था, आदर्श और मानवता को एक सूत्र में बांध देगा। यह मंच केवल कला का नहीं, बल्कि संस्कृति, श्रद्धा और मित्रता का सेतु बनेगा जो भारत और रूस के संबंधों को नई आध्यात्मिक ऊंचाई देगा।

ये कलाकार निभाएंगे किरदार

प्रभु श्रीराम का किरदार चेरन्याश वियाचेस्लाव, रावण का यूगोव अलेक्जेंडर, हनुमान का क्रासिक्रोव व्लादिस्लाव, लक्ष्मण का सेलिवरस्टोव ओलेग और सीता का बयचेनोक मिलाना निभाएंगी।

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