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'जागरण विमर्श' में बोले महापौर गिरीशपति- बदलती अयोध्या में विकास और विरासत का तालमेल जरूरी

Published: Sat, 19 Sep 2026 10:30 PM (IST)

अयोध्या में 'जागरण विमर्श' के दौरान शहर के तेजी से हो रहे विकास और सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलन बनाने पर गहन चर्चा हुई।

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HighLights

  1. अयोध्या के विकास और सांस्कृतिक पहचान पर गहन मंथन हुआ।

  2. पर्यावरण, यातायात, रोजगार व सुरक्षा जैसी चुनौतियों पर चर्चा की गई।

  3. अयोध्या के वैश्विक आकर्षण और औद्योगिक विकास की संभावनाएं तलाशी गईं।

महेन्द्र पाण्डेय, अयोध्या। श्रीरामनगरी में विकास की गति ने जहां संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं, वहीं तेजी से बदलते शहर के सामने पर्यावरण, यातायात, रोजगार, उद्योग और सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी खड़ी हुई हैं। विरासत और आधुनिकता के संगम के बीच अयोध्या जी की विकास यात्रा किस तरह आगे बढ़ाई जाए, जिसमें सांस्कृतिक पहचान कायम रहे? इस पर शनिवार को गहन मंथन हुआ।

जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने अयोध्या के अतीत से वर्तमान तक की तस्वीर पर विचार साझा किए। साथ ही शहर का स्वर्णिम भविष्य भी दिखाया।

अमानीगंज स्थित होटल क्रिनास्को में आयोजित जागरण विमर्श- ''विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित अयोध्या'' के उद्घाटन सत्र में महापौर महांत गिरीशपति त्रिपाठी ने बदलती अयोध्या के साथ विकास और विरासत के बीच संतुलन की आवश्यकता पर विचार रखे।

उन्होंने छोटी-छोटी विंसगतियों को लेकर नकारात्मकता फैलाने की साजिश से सतर्क भी किया। पहला सत्र ''विकसित अयोध्या'' पर केंद्रित रहा। इसमें महापौर के साथ विधायक वेदप्रकाश गुप्त व अवध विश्वविद्यालय के शिक्षक डा. संत शरण मिश्र ने अयोध्या की गौरवशाली संस्कृति पर गर्व किया। दूसरे सत्र में विधायक रामचंद्र यादव, डा. अमित सिंह चौहान और अभय सिंह के सामने ''भविष्य की चुनौतियां'' उभरीं।

जनप्रतिनिधियों ने अयोध्या के तेजी से विस्तार के साथ सामने आ रहीं कठिनाइयों से निपटने की संकल्पना भी दिखाई। तीसरे सत्र ने अयोध्या जी के ''वैश्विक आकर्षण'' की ओर ध्यान खींचा। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राम दिनेशाचार्य, रामकथा संग्रहालय के निदेशक डा. संजीव सिंह, साकेत पीजी कालेज के प्राचार्य प्रो. दानपति तिवारी व डा. कविता सिंह के बीच विमर्श का सार यह रहा कि मनुष्यता का बोध कराने वाली अयोध्या में नैसर्गिक आकर्षण है।

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इस सत्र में मनुस्मृति में विसंगति पर प्रश्न उठाए जाने पर संतों से आंदोलन करने की अपील भी हुई। ''इंफ्रास्ट्रक्चर व औद्योगिक विकास-संभावनाएं और चुनौतियां'' सत्र में आइआइए अयोध्या चैप्टर के चेयरमैन सुमित जायसवाल, उद्योगपति अविनाश चंद्रा, पर्यावरण विज्ञानी डा. विनोद चौधरी व विश्वप्रकाश रूपन ने आधारभूत ढांचे और पर्यावरणीय संतुलन के साथ औद्योगिक विस्तार का सुझाव दिया।

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पांचवें सत्र में एसएसपी डा. गौरव ग्रोवर, सीडीओ केके सिंह व अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुराज जैन ने ''प्रशासनिक व सुरक्षा चुनौतियां'' बताईं। विमर्श में प्रशासन, कानून-व्यवस्था और बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा प्रबंधन को बेहतर करने की राह दिखी। अंतिम सत्र में मुख्य वक्ता उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने विरोधी पार्टियों को चुनौती दी कि हिम्मत है तो अपनी मेरिट पर वोट मांगें।