विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रामयंत्र की धुन पर ठहरते कदम, सरयू घाट पर आस्था से संवर रही आजीविका

Published: Fri, 06 Nov 2026 06:08 PM (IST)

अयोध्या के सरयू घाट पर रामयंत्र विक्रेता अपनी धुन और रामभक्ति से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका आस्था से जुड़कर संवर रही है।

AI इमेज

AI इमेज

HighLights

  1. सरयू घाट पर रामयंत्र विक्रेता आस्था से जोड़ रहे आजीविका।

  2. राम मंदिर निर्माण से अयोध्या में बढ़ा धार्मिक पर्यटन।

  3. दीपोत्सव में रामयंत्र विक्रेताओं की कमाई में हुई वृद्धि।

डिजिटल डेस्‍क, अयोध्या। मां सरयू के घाटों पर दीपों की रोशनी, रामनाम की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था के बीच रामयंत्र की धुन भी पर्यटकों के कदम रोक रही है। गले में रामयंत्र टांगे और दोनों हाथों से उसकी ताल बजाते विक्रेता घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
रामभक्ति के गीतों के साथ रामयंत्र की धुन वातावरण में घुलती है तो सहसा लोगों की नजरें इन विक्रेताओं की ओर चली जाती हैं। देशी पर्यटकों के साथ विदेशी श्रद्धालु भी इसकी आवाज सुनकर ठहर जाते हैं। कोई इसकी धुन सुनता है तो कोई रामभक्ति की इस निशानी को अपने साथ ले जाने के लिए खरीदता है। 50 रुपये में एक जोड़ा रामयंत्र बेचने वाले ये विक्रेता आस्था को आजीविका से जोड़ रहे हैं।

गोरखपुर के सचींद्रनाथ सरयू घाट पर रामयंत्र बेचते हैं। एक जोड़ा 50 रुपये में देते हैं। आम दिनों में उनकी रोजाना कमाई 800 से 1000 रुपये तक होती है, जबकि दीपोत्सव के दौरान यह बढ़कर 1800 से 2500 रुपये तक पहुंच रही है। उनके लिए रामयंत्र बेचना केवल कारोबार नहीं, बल्कि रामभक्ति से जुड़ने का माध्यम भी है।

सचींद्रनाथ बताते हैं कि रामयंत्र बेचने के साथ रामभक्ति के गीत गाते हैं। श्रद्धालु धुन सुनकर रुकते हैं और रामयंत्र खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। दीपोत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने से कमाई भी अच्छी हो जाती है। रामयंत्र श्रद्धालुओं के लिए आस्था की स्मृति बनता है तो विक्रेता के लिए घर-परिवार चलाने का सहारा।

बिहार के राजेंद्र महतुर की कहानी भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाती है। वह पिछले तीन वर्षों से रामयंत्र बेच रहे हैं। आम दिनों में उनकी रोजाना कमाई 800 रुपये के आसपास तक होती है, लेकिन दीपोत्सव के दौरान अब 2000 रुपये तक रोज की आय हो रही है। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में बढ़े श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आवागमन ने उनके कारोबार को नई गति दी है।
राजेंद्र महतुर कहते हैं, ‘राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में लोगों का आना बढ़ा है। रामयंत्र की धुन सुनकर लोग रुकते हैं और खरीदते हैं। इससे हमारा रोजगार भी अच्छा चल रहा है और रामभक्ति से जुड़े रहने का अवसर भी मिलता है।‘ पहले दूसरे काम में लगे राजेंद्र अब रामयंत्र बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित हो रही नगरी ने धार्मिक पर्यटन के साथ छोटे कारोबारियों के लिए भी नए अवसर पैदा किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में रामनगरी के विकास तथा दीपोत्सव जैसे आयोजनों से श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही घाटों के छोटे विक्रेताओं की कमाई में भी दिखाई दे रही है।
रामयंत्र की धुन यहां केवल धार्मिक वातावरण नहीं रचती, बल्कि आस्था, परंपरा और रोजगार को एक साथ जोड़ती है। सरयू के घाटों पर इसकी गूंज के साथ श्रद्धालु रामभक्ति की स्मृति लेकर लौटते हैं और विक्रेता अपनी रोजी-रोटी का नया आधार।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।