पिता-पुत्र निभा रहे परशुराम-राम का किरदार तो सगी बहनें बनीं सीता-कैकेई, रामलीला के मंच पर जीवंत हो रहे रिश्ते
अयोध्या की रामलीला में कई परिवार महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं, जहां बहनें नैंसी और दिव्यांशी सीता व कैकेयी के रूप में सबका ध्यान खींच रही हैं।

दिव्यांशी और नैन्सी।
HighLights
नैंसी सीता, दिव्यांशी कैकेयी बनीं, सगी बहनें।
विकास गुप्ता परिवार 30 वर्ष से रामलीला से जुड़ा।
घनश्याम बछड़ा 45 वर्ष से रावण का किरदार निभा रहे।
प्रवीण तिवारी, अयोध्या। इन दिनों रामलीला मंचों पर पुरानी के साथ नई पीढ़ी भी भगवान श्रीराम के आदर्श से अनुप्राणित व अनुशासित हो रही है। कहीं पर भाई-भाई तो कुछ जगहों पर पिता-पुत्र रामायण के विभिन्न पात्रों को जीवंत कर रहे हैं।
इस बार वर्षों से संचालित हो रही साहबगंज की रामलीला नारीशक्ति की प्रतिष्ठा के लिए प्रमुख है। यहां दो सगी बहनें नैंसी व दिव्यांशी अपने-अपने अभिनय से सबका ध्यान खींच रहीं हैं। नैंसी एक अंग्रेजी माध्यम निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य करती हैं।
दिव्यांशी कक्षा 11 में पढ़ती हैं। नैंसी सीता की भूमिका तो वहीं दिव्यांशी कैकेयी का अभिनय कर रहीं हैं। ये हैदरगंज की निवासी हैं। इसके अतिरिक्त साकेत महाविद्यालय के समीप निवास करने वाले 50 वर्षीय विकास चंद्र गुप्ता परशुराम की भूमिका जीवंत करते हैं।
उनके दो बेटे क्रमश: लकी गुप्ता भगवान राम, आकाश गुप्ता मेघनाथ के चरित्र को जीते हैं। ये परिवार मिष्ठान बनाता व बिक्री करता है। ये परिवार 30 वर्ष से लीला समिति से जुड़ा हैं और सक्रिय है।
इसी तरह लक्ष्मण का रोल निभाने वाले कृष्ण गुप्ता के भाई पार्श्व रोल में दिखते हैं। मंच संचालित करने वाले दीपक पांडेय बताते हैं कि विकास यादव व नीरज पाठक कलाकारों को प्रशिक्षित व इनके संवादों को संयोजित करते हैं।
सामाजिक तानाबाना पुष्ट कर रहे कई किरदार
45 वर्ष से रावण का रोल निभाने वाले घनश्याम बछड़ा सुलतानपुर के निवासी हैं। ई- रिक्शा चला कर परिवार पालते हैं। लीला देखने वाले दर्शन घनश्याम के अभिनय के मुरीद हैं।
उनके अट्टहास पर खूब तालियां मिलती हैं। इनका मेल मिलाप भी सभी से है। एक अन्य कलाकार प्रमोद गौड़ दशरथ व उनका भाई मोनू गौड़ कुंभकर्ण के रोल में होते हैं। मोनू ई रिक्शा संचालित करते हैं। भाजपा के महानगर के पदाधिकारी भी रहे चुके हैं।
