रामजन्मभूमि की लड़ाई कैसे चढ़ी परवान, बताएगी ‘संघर्ष की अमरगाथा’ गैलरी; अगले वर्ष खुलेगा संग्रहालय
अयोध्या में बन रहा अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय अगले वर्ष तक दर्शनार्थियों के लिए खुल जाएगा। इसमें भगवान श्रीराम, रामायण और ...और पढ़ें
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HighLights
अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय अगले वर्ष तक दर्शनार्थियों के लिए खुलेगा।
'संघर्ष की अमरगाथा' गैलरी में राम मंदिर आंदोलन का इतिहास।
'आस्था के प्रपत्र' में श्रीराम के प्रति वैश्विक आस्था का चित्रण होगा।
लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सरयू तट पर विकसित कराए जा रहे अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय को अब आकार मिलने लगा है। अगले वर्ष तक इसे दर्शनार्थियों के दर्शनार्थ खोल देने की तैयारी है। संग्रहालय की सभी 20 गैलरियों का नामकरण पूरा हो गया है। अब इसमें प्रदर्शित किए जाने वाले भगवान श्रीराम, रामायण व रामकथा से जुड़े प्रदर्शों, पुरावशेषों, सामग्री व साक्ष्यों को भी एकत्रित कर लिया गया है।
संग्रहालय की ‘आस्था के प्रपत्र’ नामक एक गैलरी (वीथिका) में जहां विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्रति वैश्विक आस्था का चित्रण होगा, तो ‘संघर्ष की अमरगाथा’ नामक दूसरी वीथिका में जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के लिए पांच सौ वर्षों तक चले लंबे आंदोलन और अदालती लड़ाई से जुड़े सभी अभिलेख प्रदर्शित किए जाएंगे। वहीं, ‘रामजन्मभूमि : एक अमिट धरोहर’ नामक वीथिका में वर्ष 2003 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की ओर से की गई जन्मभूमि की खोदाई और मंदिर निर्माण के समय यत्र-तत्र मिले पुरावशेषों काे प्रदर्शित किया जाएगा।
संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह बताते हैं कि वीथिका ‘आस्था के प्रपत्र’ में जन्म के उपरांत से ही प्रभु श्रीराम के प्रति किस प्रकार आस्था प्रगाढ़ होती गई, इसे धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। ‘संघर्ष की अमरगाथा’ नामक गैलरी में आंदोलन के प्रारंभिक संघर्षों, जनांदोलन बनने और लंबे अदालती संघर्ष से संबंधित अभिलेख प्रदर्शित होंगे। सभी गैलरियों के लिए सामग्री, साक्ष्यों व ऐतिहासिक दस्तावेज जुटा लिए गए हैं।
सूर्यवंशी क्षत्रियों का संकल्प भी होगा चित्रित
मंदिर निर्माण के लिए सूर्यवंशी क्षत्रियों के संकल्प को भी ‘आस्था के प्रपत्र’ नामक गैलरी में प्रदर्शित किया जाएगा। क्षत्रियों ने वर्षों पूर्व यह संकल्प लिया था कि जब तक जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण नहीं हो जाता, वह कभी जूता नहीं पहनेंगे और विवाह समारोहों में सिर पर पगड़ी नहीं बांधेंगे। इसके साथ मंदिर निर्माण से जुड़े अन्य संकल्पों का भी प्रदर्शन होगा।
