राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की विवेचना पर कोर्ट की नजर, निष्पक्ष जांच के लिए आगे भी होती रहेगी निगरानी
न्यायालय ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की विवेचना पर अपनी निगरानी जारी रखने का आदेश दिया है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की विवेचना पर कोर्ट की नजर।
HighLights
राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच पर न्यायालय की निगरानी जारी।
फैजाबाद बार एसोसिएशन की अर्जी पर कोर्ट का आदेश।
निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित करने को निगरानी आगे भी रहेगी।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की धनराशि व अन्य वस्तुओं की चोरी से जुड़े मुकदमे की विवेचना पर न्यायालय की निगरानी आगे भी जारी रहेगी। विवेचना की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए फैजाबाद बार एसोसिएशन की मॉनिटरिंग अर्जी पर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम रजत वर्मा ने अपना आदेश सुना दिया है। न्यायालय ने कहा मामले की विवेचना शुरू से ही न्यायालय की निगरानी में चल रही है और आगे भी चलती रहेगी।
मंत्री शैलेंद्र जायसवाल ने अर्जी देकर आरोप लगाया था कि चढ़ावा चोरी मामले की विवेचना में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव की भूमिका की भी जांच की मांग की थी।फर्द बरामदगी, रकम, गवाहों के नाम में ओवरराइटिंग तथा विवेचना की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे।
वहीं, विवेचक की आपत्ति में इन आरोपों को काल्पनिक बताते हुए कहा गया कि विवेचना एसआटी के पर्यवेक्षण में चल रही है। आठ आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है और चोरी से संबंधित धनराशि, जेवरात, विदेशी मुद्राएं व सिक्के ट्रस्ट के लाकर से बरामद किए गए हैं। विवेचना में फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया है तथा इसकी प्रगति समय-समय पर सर्वोच्च न्यायालय को बताई जा रही है।
चंपतराय, अनिल मिश्र और गोपाल राव के विरुद्ध अब तक की विवेचना में उनकी संलिप्तता की पुष्टि करने वाला कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है। वहीं, प्रकरण के वादी कृष्ण मोहन को आरोपित बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। विवेचक ने मॉनिटरिंग अर्जी को महज पेशबंदी में प्रस्तुत करना तक बताया है।
कोर्ट का आदेश
न्यायालय ने कहा कि केस डायरी और अभिलेखों के अवलोकन, रिमांड आदेश, पुलिस कस्टडी रिमांड सहित समय-समय पर पारित आदेशों के जरिए वह पहले से ही इस प्रकरण की विवेचना पर निगरानी रखता रहा है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश में विवेचना की मॉनीटरिंग न्यायालय द्वारा की जाती रही है और आगे भी की जाती रहेगी।
